Monday, May 23, 2022
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मारकुंडी घाटी स्थित लोरिक पत्थर पर गोवर्धन पूजा सम्पन्न : पतिवाह बाबा का हैरतंगेज कारनामा देखकर हर कोई हुआ चकित

सोनभद्र। मारकुंडी घाटी स्थित वीरलोरिक व मंजरी की अमर प्रेमगाथा से जुड़ा वीर लोरिक पत्थर स्थल शनिवार को कई हैरतंगेज करतबों का साक्षी बना । मौका था यादव महासभा की तरफ से जिले के सबसे बड़े एवं विराट गोवर्धन पूजा के आयोजन का | पतिवाह बाबा राजेंद्र यादव ने जहां कई हैरतंगेज करतब दिखाए । वहीं खौलते दूध से स्नान कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया । इस दौरान उन्होंने भविष्य की स्थिति को लेकर जहां कई जानकारियां दी । वहीं कई लोगों को उनके दुख – दर्द के निदान के लिए उपाय भी सुझाए ।

मुख्य अतिथि एमएलसी लालबिहारी यादव , विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री संजीव गोंड़ , संरक्षक मंडल अध्यक्ष राम निहोर यादव , पूजा समिति संरक्षक मंडल प्रमुख सदस्य रोशन लाल यादव , सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय यादव , जिलाध्यक्ष विजय यादव , पूर्व सांसद नरेंद्र कुशवाहा , पूर्व विधायक रमेश दूबे , अविनाश कुशवाहा , यादव महासभा के महासचिव दयाराम सिंह यादव , जयप्रकाश उर्फ चेखुर पांडेय , नेपाल की विधायक रीना यादव ने भी गोवर्धन पूजा के महत्व पर प्रकाश डाला।

नेपाल की विधायक रीना यादव ने गोवर्धन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस तरह से भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव का अहम तोड़कर अन्याय को सहने की बजाय उसके खिलाफ आवाज उठाने की सीख दी । उसी तरह से हमें भी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ और आमजन के उत्थान के लिए लगातार आवाज उठाते रहना चाहिए । मारकुंडी पहाड़ी स्थिति वीर लोरिक पत्थर पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि लोकगाथा के महानायक वीर लोरिक और उनकी पत्नी मंजरी के वर्षों पूर्व यहां कदम पड़े थे । उसी समय उनके द्वारा वीर लोरिक पत्थर के रूप में अमर प्रेम की अमर निशानी यहां छोड़ दी गई थी । इस स्थल को पर्यटन की दृष्टि से संवारने की भी आवाज उठाई गई और इसके लिए जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार से पहल की मांग की गई ।

गोवर्धन पूजा समिति की तरफ से बताया गया कि वीर लोरिक पत्थर गोवर्धन पूजा समिति संरक्षक मंडल यहां वीर लोरिक और मंजरी की आदमकद मूर्ति लगवाने की तैयारी कर रहा है । वीर लोरिक पत्थर को आने वाले समय के लिए भी संरक्षित रखने की दृष्टि से कार्य कराए जाएंगे । आपको बताते चलें कि मान्यताओं के मुताबिक वीर लोरिक ने 16 मन के तेगा से वार कर इस पत्थर को काटा था । उसके दो भाग उसी तरह खड़े हैं । जबकि एक भाग जमीन पर गिर गया है । कार्यक्रम का संचालन बाबूलाल यादव ने किया ।

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