विनोद सिंह

लखनऊ । लखनऊ स्थित महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के सातवें दीक्षांत समारोह में पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कम उम्र की लड़कियों के साथ हो रही घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा, गर्लफ्रेंड बनाने में कोई बुराई नहीं है। लेकिन छोटी-छोटी बच्चियों को मां बनाकर छोड़ देना गलत है। युवाओं को सलाह देते हुए राज्यपाल ने कहा, अगर किसी लड़की से शादी का वादा किया है तो उसे पूरा भी करो।

उन्होंने कहा कि, युवाओं को पहले अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए, ताकि वे परिवार की जिम्मेदारी उठा सकें। नौजवानों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, छात्र गलत कामों में हिस्सा न लें और न ही किसी दूसरे साथी को ऐसा करने दें। अच्छे लोगों के साथ रहेंगे तो अच्छे विचारों के महत्व भी समझेंगे।

उन्होंने युवाओं को पानी का उदाहरण देते हुए समझाते हुए कहा, अगर लगातार उसमें गंदगी डाली जाएगी तो साफ पानी दूषित हो जाएगा, लेकिन उसे साफ रखने का प्रयास किया जाए तो पानी की शुद्धता बनी रहेगी। इसी तरह समाज में अच्छे विचारों और सही ज्ञान को बढ़ावा देना भी जरूरी है।

इस दौरान राज्यपाल ने कम उम्र में लड़कियों को मां बनाकर छोड़ देने की प्रवृति पर भी सवाल उठाए। राज्यपाल ने कहा, युवाओं को अपने फैसलों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए और समाज में गलत गतिविधियों को रोकने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा, 13 से 14 साल उम्र की लड़कियों को मां बनाकर छोड़ देना सही नहीं है।

युवाओं के ज्ञान और मेहनत का सही इस्तेमाल जरूरी

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा, युवाओं के ज्ञान और मेहनत का सही इस्तेमाल जरूरी है। गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, उन्हें शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के अवसर भी उपलब्ध कराने होंगे, तभी वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा, विकसित भारत के निर्माण के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं भी चला रही है, जिसके लाभ उठाया जा सकता है। युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, युवा डेटा जुटाएं और आर्टिफिशियिल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने की कोशिश करें। उन्होंने कहा, युवाओं को इन तकनीकों का उपयोग देश को आत्मनिर्भर बनाने और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में करना चाहिए।

राज्यपाल ने गुजरात सरकार का भी जिक्र किया

राज्यपाल आंनदी बेन पटेल ने गुजरात सरकार का जिक्र करते हुए कहा, जब वह मंत्री और मुख्यमंत्री थीं, तो उन्होंने गुजरात में गरीब बच्चों के लिए एक पहल शुरू की थी। उन्होंने बताया कि लोगों से मुलाकात के दौरान होने वाले खर्च को समाज के हित में इस्तेमाल करने का विचार आया था। इसके बाद उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए चने और गुड की व्यवस्था की थी।