जिलाधिकारी के नाक के नीचे काटा जा रहा है पेड़, सो रहा है प्रशासन
जहां एक ओर प्रदूषण से निपटने के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर न सिर्फ वृक्षारोपण अभियान चला रही हैं साथ जनता को वृक्षारोपण के लिए जागरूक कर रही है वहीं कलेक्ट्रेट के सामने लगे पेड़ इसलिए काट दिये जा रहे हैं कि वे बिजली के तार को टच ----
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विंध्यलीडर संवाददाता
सोनभद्र । जहां एक ओर प्रदूषण से निपटने के लिए केन्द्र और प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर न सिर्फ वृक्षारोपण अभियान चला रही हैं साथ जनता को वृक्षारोपण के लिए जागरूक कर रही है वहीं कलेक्ट्रेट के सामने लगे पेड़ इसलिए काट दिये जा रहे हैं कि वे बिजली के तार को टच कर रहे हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे जलावनी लकड़ी के साथ मोटे पेड़ों को काटा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि कलेक्ट्रेट और विकास भवन के बीच इस तरह से पेड़ कट रहे हैं और कोई रोकने या टोकने वाला नहीं है।

पेडों को काट रहे लोगों की दलील है कि तेज हवाओं के झोंकों से पेड़ बिजली के तारों से टकरा रहे जिससे विद्युत आपूर्ति बाधित होती हैं । लेकिन सवाल यह उठता है कि जब वृक्षारोपण किया जा रहा था तो उस समय इसका ध्यान क्यों नहीं दिया गया, और फिर यह कटान की परमिशन किसने दी।

चूंकि मामला हाईप्रोफाइल की असुविधा का है तो कोई पूछने की जहमत भी नहीं उठा रहा। लेकिन पर्यावरण को जिस तरह से नुक्सान पहुंचाया जा रहा है वह किसी से छिपी नहीं है। यही काम यदि कोई गरीब अपने चूल्हा जलाने के लिए करता तो शायद वह सलाखों के पीछे होता।पेड़ो की कटाई क्यों और किसके तथा किस लिए हो रही के सम्बन्ध में जानने के लिए प्रभागीय वनाधिकारी से विंध्यलीडर द्वारा सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।



