Wednesday, November 30, 2022
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लोक अदालतों का सबसे बड़ा गुण निःशुल्क तथा त्वरित न्याय – न्यायमूर्ति गौतम चौधरी

मा.उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति /प्रशानिक न्यायमूर्ति सोनभद्र ने दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किये।

सोनभद्र-: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन पर जनपद न्यायालय सोनभद्र के परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। मा.न्यायमूर्ति श्री गौतम चौधरी माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद / प्रशासनिक न्यायमूर्ति सोनभद्र ने मां सरस्वती के प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर इसका शुभारंभ किया।

प्रशासनिक न्यायमूर्ति सोनभद्र ने मां सरस्वती के प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रीय लोकअदालत का शुभारंभ करते हुए

माननीय न्यायमूर्ति ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहां की लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित वादों में कोर्ट फीस नहीं लगती है। माननीय न्यायमूर्ति ने इस पर भी जोर दिया की लोक अदालत में किसी पक्ष को सजा नहीं होती एवं मामले को बातचीत द्वारा सौहार्द पूर्ण तरीक़े से हल कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में वादों के निस्तारण से मुआवजा और हर्जाना तुरंत मिल जाता है एवं मामले का तुरंत निपटारा हो जाता है व वादकारियो को आसानी से न्याय मिल जाता है।

अपने संबोधन में उन्होंने लोक अदालत के बारे में कहा कि लोक अदालत में निस्तारित फैसले अंतिम होते हैं और फैसलों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती। माननीय न्यायमूर्ति ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सारी न्याय व्यवस्था अधिवक्ताओं के काम पर टिकी हुई है इतना कहना अतिशयोक्ति नही है कि अधिवक्ता न्यायालय के अधिकारी हैं।

लोक अदालत को सफल बनाने में अधिवक्ताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वह वादकारियों व न्यायालय के बीच की कड़ी है। माननीय महोदय ने मेडिएशन पर जोर दिया एवं उसके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की एवं कहा कि मेडिएशन के माध्यम से बड़े-बड़े मामले सुलझ जाते हैं एवं मेडिएशन के माध्यम से न्यायालय में लंबित मामलों का निस्तारण आपसी सुलह समझौते से किया जा सकता है।

लोक अदालतों का सबसे बड़ा गुण निःशुल्क तथा त्वरित न्याय है।यह विवादों के निपटारे का वैकल्पिक माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी नागरिक आर्थिक या किसी अक्षमता के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाए।
जिले के विभिन्न न्यायालयों में कुल 37,940 वाद निस्तारित किये गए और जिसमे 10 करोङ80 लाख 80 हजार 136 रुपये की प्रतिकर/जुर्माना की धनराशि वसूली गयी।

नोडल अधिकारी श्रीमती निहारिका चौहान ने
कहा कि लोकतंत्र का महापर्व राष्ट्रीय लोक अदालत है इस पर्व में बिना किसी श्रम और धन के आपसी सौहार्दपूर्ण तरीके से वादों का निस्तारण भी होता है व किसी भी पक्षकार की हार-जीत नही होती है।

इस मौके पर जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार प्रथम(अध्यक्ष)जिला विधिक सेवा प्राधिकरण , संजीव कुमार त्यागी प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय व एमएसिटी के पीठासीन अधिकारी संजय हरि शुक्ला ,श्रीमति निहारिका चौहान,नोडल अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व अपर जनपद न्यायाधीश, पंकज कुमार(पूर्णकालिक सचिव)के साथ कई न्यायिक अधिकारी व विद्वान अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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