Monday, May 20, 2024
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सोलर पैनल,बैटरी इन्वर्टर व कम्प्यूटर खरीद में घटिया सामग्री लेकर लाखों के घोटाले पर पर्दा डाल सो गया पंचायत विभाग

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मामला जिले के 629 ग्राम पंचायतों में बने पंचायत सचिवालय में सोलर प्लेट ,इन्वर्टर बैटरी के खरीद में घटिया सामग्री की आपूर्ति किये जाने से सम्बंधित है।

–जिले के कई ब्लॉकों से डीपीआरओ ऑफिस फ़ाइल हो चुकी है तलब , पर महीनों गुजरने के बाद भी नतीजा है सिफर

सोनभद्र|सरकार द्वारा पंचायतों को शशक्त बनाने के उद्देश्य से पंचायतों द्वारा सम्पादित किये जाने वाले कार्यो को वहीं पंचायत सचिवालय पर ही निष्पादित करने के लिए जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सोलर पैनल, बैटरी इन्वर्टर लगाने के आदेश जारी किए गए थे।परन्तु उक्त सामानों की खरीद में पंचायत विभाग के जिम्मेदार लोगों द्वारा घटिया सामग्री की आपूर्ति करा बड़े पैमाने पर गोल माल किया गया और जब उक्त सामग्रियों की खरीद में घोटाले की खबरें सुर्खियां बटोरने लगी तो आनन फानन पंचायती राज विभाग द्वारा ब्लॉकों से उक्त सामग्री खरीद से सम्बंधित फाइलों को जिले पर मंगवाया गया पर जांच की गति को देखकर लगता है कि विभागीय लोग चाहते हैं कि समय गुजरने के साथ ही धीरे धीरे लोग घोटाले की बात भी भूल जाएंगे और इस तरह पंचायती राज विभाग उक्त घोटाले की फाइल पर इतनी धूल जमा देगा कि कुछ दिखाई ही न दे।

यहां आपको बताते चलें कि कुछ माह पूर्व जब समाचार पत्रों व सोसल मीडिया पर जब उक्त घोटाले को लेकर खबरों ने सुर्खियां बटोरनी शुरू की तो जिलाधिकारी के निर्देश पर डीपीआरओ ने जिले के सभी ब्लॉकों से सोलर इन्वर्टर बैटरी व पैनल खरीद का ब्यौरा तलब किया कि किस ग्राम पंचायत में किस ब्रांड की और कितनी क्षमता की सोलर प्लेट व इन्वर्टर व बैटरी खरीदी गई है।

पंचायत विभाग से उक्त खरीद से सम्बंधित जांच की चिठ्ठी जारी होते ही ग्राम पंचायत सचिवों व सप्लायरों में हड़कंप मच गया कि कहीं ब्रेंच घोटाले की तरह इस सामग्री खरीद में भी रिकवरी ना होने लगे।परन्तु ब्यौरा व फ़ाइल तलब करने के महीनों बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ पाई अथवा किसी को नहीं पता कि उक्त सामग्री खरीद का सच क्या है।फिलहाल लगता है डीपीआरओ पंचायत सचिवालयों पर क्रय किये गए सोलर पैनल ,इन्वर्टर, बैटरी व कम्प्यूटर प्रिंटर आदि सामग्रियों की खरीद से सम्बंधित फाइलों को जांच हेतु तलब कर शांत हो गए और प्रकरण में फिलहाल कोई कार्रवाई आगे नही बढ़ी। पंचायत विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली पर अब लोग बाग सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं।कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं व शोसल एक्टिविस्ट ने यह भी कहा कि पंचायत विभाग की यह पुरानी कार्यप्रणाली है कि जांच के नाम पर इतना लटकाओ की धीरे धीरे लोग घोटाले को भूल ही जाएँ।

यहां आपको बता दे कि सोलर पैनेल इन्वर्टर बैटरी की खरीद में पूरे जिले में 50 लाख से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है , विभाग पर पैनी नजर रखने वाले लोगों की मानें तो ग्राम पंचायतों में 75 एम्पियर की दो बैटरी व एक इन्वर्टर व 200 वाट की दो सोलर प्लेट खरीद की गई है ।उक्त सामानों की सामान्यतया बाजारी कीमत 24000 से25000 बताई जा रही है।जबकि सामग्रियों का भुगतान पर 37500 से 38000 प्रति सेट के हिसाब से ब्यय किया गया है। इस तरह से प्रति सेट 12500 से 13000 का भुगतान सामान्य बाजारी कीमत से अधिक कर सरकार को चूना लगाया गया है । सरकार की योजना थी कि ग्राम पंचायत सचिवालयों में 150 एम्पियर की दो ब्रांडेड बैटरी , 2000 वाट का एक सोलर इन्वर्टर व 300 वाट के सोलर प्लेट लगाए जाने थे परन्तु जानकारों की माने तो लगाए गए सेट इससे भिन्न हैं। इतना ही नहीं सोनभद्र मुख्यालय के दूरस्थ के कुछ ब्लॉकों में तो कम्प्यूटर, सोलर पैनल व कुर्सी मेज तथा बैटरी आदि की सप्लाई मुख्यालय के एक संस्थान से सेंट्रलाइज्ड रूप से की गई जिसमें ब्यापक रूप से मानक विहीन सामानों की आपूर्ति लेकर गोलमाल किया गया।

इस घटना ने एक बार फिर पंचायती राज विभाग को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है ,उधर प्रधानों की माने तो वे सोलर इन्वर्टर बैटरी पैनल की खरीद कम भाव पर बाजार से करना चाह रहे थे लेकिन विभाग के ही कुछ लोगों के दबाव के कारण मजबूरन ऊंचे दरों पर कम क्षमता के इन्वर्टर बैटरी व पैनल की खरीद चहेतों के माध्यम से किया गया और बिना सहमति भुगतान भी कर दिया गया।मामला का तूल पकड़ता देख डीपीआरओ ने कुछ माह पूर्व भुगतान पर रोक लगाया था लेकिन माहौल को शांत होता देख अब सचिव भुगतान करना शुरू कर दिए है और उधर ग्राम पंचायत सचिवालय को रोशन करने के उद्देश्य से कम क्षमता के लगे सोलर इन्वर्टर बैटरी भी जबाब देना शुरू कर चुके हैं।अब देखना होगा कि आगे पंचायत विभाग का क्या रुख होता है ?क्या जांच में कुछ निकलता भी है या फिर ऑल इज वेल ही रहता है ?

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