Monday, May 23, 2022
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खण्ड शिक्षा अधिकारी के सामने अभिभावकों का छलका दर्द ,कहा नहीं होती विद्यालय में पढ़ाई

सोनभद्र बहरहाल सोनभद्र देश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक है जिसे वर्तमान केंद्र सरकार ने आकांक्षी जिला के रूप में नई पहचान देकर इसके विकास का खाका खींचने में लगी है ।नीति आयोग इन आकांक्षी जिलों के विकास के लिए नित नए प्रयोग भी कर रही है।आकांक्षी जिलों के विकास के पैरामीटर में बेशिक शिक्षा का विकास सबसे महत्वपूर्ण मद है। मगर जनपद की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार से ध्वस्त होती जा रही है कि ऐसे में यह कहा जा सकता कि यदि यही हाल रहा तो न बीएसए साहेब की अपील काम आएगी औऱ शायद सोनभद्र पिछड़े जनपदों के दंश से कभी बाहर ही निकल पाएगा ।

आपको पिछले दिनों बीजपुर के एक स्कूल में घटी एक घटना के माध्यम से इसे समझाने का प्रयास कर हैं रहे जिसके विश्लेषण से आप सोनभद्र की बेशिक शिक्षा के हाल का स्वंय समझ सकते हैं।घटना यह है कि पिछले दिनों मीडिया में छपी खबरों के बाद जिलाधिकारी ने बेशिक शिक्षा के अध्ययन अध्यापन पर अटैचमेंट व अन्य कारणों से पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव के मद्देनजर विभाग की नकेल कसते हुए स समय सभी अधयापकों को विद्यालय पहुचने का फरमान सुनाया जिसके बाद बीजपुर के प्रभारी प्रधानाचार्य ने बुधवार को सिरसोती विद्यालय पर कुछ अध्यापकों के समय पर न पहुंचने पर प्रभारी द्वारा सख्त हिदायत दी गयी तो पूरे दिन अध्यापकों के बीच कहासुनी व नोंकझोंक होती रही । बच्चे क्लासरूम में तो अभिभावक बाहर इंतजार करते रहे कि अब पढ़ाई शुरू होगी लेकिन टीचर अपना मसला सुलझाने में ही पूरे दिन व्यस्त नजर आए ।

बुधवार की घटना को लेकर गुरुवार को म्योरपुर के एबीएसए सिरसोती विद्यालय पहुंचे । यूँ तो एबीएसए के आने की खबर पूरे क्षेत्र के लोगों को पहले से थी, लिहाजा टीचर उनके आने के पहले ही पहुंच गए थे । एबीएसए के पहुंचते ही स्थानीय अभिभावकों ने उनका घेराव कर उन्हें स्कूल की समस्याओं से अवगत कराया ।
लोगों ने खण्ड शिक्षा अधिकारी को बताया कि इस स्कूल में उनके बच्चे पढ़ने आते हैं लेकिन स्कूल में पढ़ाई बिल्कुल नहीं होती ।




एबीएसए साहब करते भी क्या, क्योंकि यह समस्या एक दिन की नहीं है । यहां आपको एक पुरानी कहावत के आधार पर कि जैसा बोओगे, वही तो काटोगे ” के अनुसार ही खण्ड शिक्षा अधिकारी ने भी लोगो को समझाने का प्रयास किया। स्कूल कैसे सुधरेगा इसे लेकर घण्टों मंथन होता रहा, फिर साहेब ने अभिभावकों को बताया कि बात हो गयी है आगे से शिकायत नहीं मिलेगी।


बीजपुर की घटना को लेकर जब बीएसए से पूछा गया तो बीएसए भी ज्ञान बांटते नजर आए और वह अध्यापको से अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की अपील करने लगे । खैर जो भी हो जैसे ही यह फरमान जारी हुआ है कि अध्यापक समय से स्कूल पहुंचे और अपने मूल तैनाती वाले स्कूल पर ही पहुंचे कारण की जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद अटैचमेंट की व्यवस्था समाप्त कर दी गयी है जिसकी वजह से कुछ अध्यापक जो सत्तापक्ष के रसूखदारों की वजह से मजे काट रहे थे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।फिलहाल तत्काल इस फरमान को निष्प्रभावी करने के लिए भी ऐसे अध्यापकों ने जुगाड़ लगा लिया है जिसके मुताबिक तत्काल जुगाड़ वाले अध्यापकों ने छुट्टी ले ली है जिसकी वजह से कई विद्यालय बन्दी के कगार पर पहुंच गए हैं।आगे देखना होगा की शिक्षा विभाग किस तरह से इन विगड़े हुए शिक्षको को अंकुश में लेता है।




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