Tuesday, February 27, 2024
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UP Politics : अगले माह बदल सकते हैं भाजपा के 40 से अधिक जिलाध्यक्ष , गंभीर शिकायत वाले जिलाध्यक्षों की छिनेगी कुर्सी

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आगामी आसन्न लोकसभा चुनाव के लिए संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करने में लगी भाजपा अब जिलों में भी करेगी फेरबदल। सूत्रों की माने तो पार्टी के महाजनसंपर्क अभियान के समापन के बाद अगले महीने उत्तरप्रदेश के 40 से अधिक भाजपा जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक जिन मानकों के आधार पर बदलाव होने हैं उसके अनुसार सोनभद्र sonbhadra भी इस सूची में दर्ज करा सकता है अपना नाम।

UP POLITICS NEWS (lucknow) लखनऊ : आगामी आसन्न लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करने में लग गयी है और इसी के साथ अब उन जिलों में भी फेरबदल करने की सुगबुगाहट तेज हो गयी है जिन जिलों में सँगठन में गुटबाजी पर नकेल कसने में वर्तमान जिलाध्यक्षों के विफल रहने के कारण पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनावों में नुकसान होने की सम्भावना बढ़ गयी है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक पार्टी के महाजनसंपर्क अभियान के समापन के बाद उत्तरप्रदेश में अगले महीने 40 से अधिक भाजपा जिला अध्यक्ष बदले जाएंगे। जिलों में होने वाले इस बदलाव के दृष्टिगत दावेदारों ने जोर मारना शुरू भी कर दिया है और भाजपा प्रदेश कार्यालय में दस्तक दे रहे हैं।

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हटाए जाने वाले जिलाध्यक्षों में कुछ ऐसे हैं जो लंबे समय से इस ओहदे पर जमे हुए हैं और जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर दो बार बैठने का मौका पा चुके हैं। दूसरी श्रेणी उन जिलाध्यक्षों की है जिनके विरुद्ध विभिन्न प्रकार की शिकायतें मिली हैं। यह शिकायतें पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने या उन् कार्यकर्ताओं या पदाधिकारियों को शह देने जो कि संगठन या फिर पार्टी को कमजोर करने में लगे रहते हैं या फिर उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं । जबकि कुछ जिलाध्यक्षों के विरुद्ध जिले में पार्टी संगठन व कार्यकर्ताओं में समन्वय स्थापित न कर पाने और व्यवस्था जनित शिकायतें प्राप्त हुई हैं प्रदेश नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया है और लोकसभा चुनाव से पूर्व ऐसे जिलाध्यक्षों को बदल ससँगठन को चुस्त दुरुस्त करने की कवायद चल रही है।

अभी हालिया सम्पन्न नगरीय निकाय चुनाव में वांछित परिणाम न दिला पाने वाले भी हटेंगे

कुछ ऐसे जिलाध्यक्ष भी हैं जो विभिन्न उपचुनावों और नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी को वांछित परिणाम न दिला पाने के कारण हटाये जाएंगे। माना जा रहा है कि यदि जिले का चुनाव परिणाम पार्टी के अनुकूल नहीं रहा तो इसमें प्रत्याशी चयन में हुए गलत निर्णय से लेकर चुनावी रण की तैयारी में कहीं न कहीं कमी रही है। इसके लिए भी जिलों से जिलाध्यक्षों के मार्फत मिले फीडबैक को जिम्मेदार माना जा रहा है।

इनकी भी होगी बदली

इनके अलावा कुछ ऐसे भी जिलाध्यक्ष व महानगर अध्यक्ष भी बदले जाएंगे जो विधान परिषद सदस्य बन चुके हैं। इनमें लखनऊ के महानगर अध्यक्ष मुकेश शर्मा, वाराणसी के जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, अलीगढ़ के ऋषिपाल सिंह और कानपुर देहात के अविनाश चौहान शामिल हैं।

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नगरीय निकाय चुनाव के चलते टलती रही कार्रवाई

जिलों में यह बदलाव तो अरसे से अपेक्षित थे, लेकिन नगरीय निकाय चुनाव और फिर मोदी सरकार के नौ वर्ष की उपलब्धियों को लेकर संचालित किए जा रहे महाजनसंपर्क अभियान के कारण जिलाध्यक्षों को बदलने की कार्रवाई टलती चली गई। इस माह के अंत में महाजनसंपर्क अभियान समाप्त होने के बाद प्रदेश नेतृत्व जिलों में होने वाले इस बदलाव में जुट जाएगा।

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