Monday, August 15, 2022
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निजीकरण – एन पी एस के विरोध में अटेवा ने निकाली पेंशन पद यात्रा

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पुरानी पेंशन बहाली करने एवं एनपीएस वापस लेने की मांग को लेकर प्रदेश स्तरीय नेतृत्व के आवाह्न पर अटेवा सोनभद्र की अगुवाई में सभी शिक्षकों व कर्मचारियों ने जुलूस निकाला।

सोनभद्र। अटेवा की अगुवाई में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, लेखपाल संघ सहित जनपद के सभी शिक्षक एव कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर आज यहाँ जनपद मुख्यालय पर पेंशन पद यात्रा और धरना दिया गया । पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार रॉबर्ट्सगंज के हाईडिल मैदान में शिक्षक-कर्मचारी इकट्ठा होने लगे। जल्दी ही समूचे जनपद के दसों विकास खण्डों से आये शिक्षकों व कर्मचारियों के हज़ारो भीड़ के नारों से पूरा हाइडिल मैदान थर्राने लगा।

अटेवा जिलाध्यक्ष राजकुमार मौर्य ने एनपीएस की कमियां गिनाते हुए ओपीएस की बहाली होने तक संघर्ष करने की सबको कसम दिलाई। जल्दी ही हज़ारों की संख्या में जुलूस नगर भ्रमण पर निकला। “चाहे जो मजबूरी हो, हमारी माँगे पूरी हो” एनपीएस गो बैक” आदि के नारों से आकाश को गुंजायमान बनाते हुए शिक्षक-कर्मचारियों का जुलूस शीतला चौराहा-बढ़ौली होते हुए वापस हाइडिल मैदान पहुँचा।

शिक्षकों के जज्बे व उत्साह को देख के लग गया कि अब वो दिन दूर नही जब ओपीएस की वरमाला शिक्षकों-कर्मचारियों के गले का वरण करेगी। शिक्षकों की प्रचण्ड भीड़ देख प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए। पूरे कार्यक्रम के दौरान भारी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जिला- संयोजक अशोक त्रिपाठी ने कहा कि अगली सरकार उसी की बनेगी जो पुरानी पेंशन बहाल करेगा। सौरभ कार्तिकेय श्रीवास्तव ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग करते हुए कहा कि सरकार पुरानी पेन्शन की बहाली के तत्काल आदेश दे। अपना जीवन सरकार की सेवा करने वाले सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस और विधायक-सांसदों को जीवन भर की पुरानी पेंशन? ये दोगली व्यवस्था नही चलेगी।

अटेवा महिला प्रदेश अध्यक्ष रंजना सिंह ने कहा कि जब तक सरकार हमारी माँगे नही सुनती तब तक पुरानी पेंशन बहाली को लेकर हमारा आंदोलन चलता ही रहेगा।

पूरे प्रदेश में आज की प्रचण्ड रैली की सफलता देख अब सरकार के लिए ओपीएस की मांग को अनदेखा करना आसान नही रह गया। साथ ही अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी चुनाव पूर्व ओपीएस को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल करने से भी सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अब शिक्षक भी अपने हक को लेकर चुनाव पूर्व आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।

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