Monday, August 15, 2022
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स्व रामप्यारे पनिका के अधूरे रह गए सपनों को पूरा करने का प्रयास करूंगी-बसन्ती पनिका

सोनभद्र।विधानसभा चुनाव 2022 के समर में कांग्रेस ने आदिवासी समुदाय से आने वाले व सोनभद्र ही नहीं पूरे पूर्वांचल की राजनीति में अपनी अलग छाप छोड़ने वाले इस क्षेत्र में अपने जमाने के लोकप्रिय पूर्व सांसद रामप्यारे पनिका की पत्नी बसन्ती पनिका को दुद्धी विधानसभा क्षेत्र जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है ,से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।आपको बताते चलें कि स्वंय बसन्ती पनिका भी सोनभद्र की राजनीति में परिचय का मोहताज नहीं हैं।

वह पूर्व में सोनभद्र जिलापंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। आज कांग्रेस के जिला कार्यालय पर पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आज जो सोनभद्र की पहचान एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में है उसकी नीव कांग्रेस पार्टी ने रखी है।उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 32 वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति से कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है और उत्तर प्रदेश का इस काल खंड में विकास लगभग शून्य है।हां इतना अवश्य हुआ है कि इस कालखण्ड में उत्तर प्रदेश में धर्म व जाति आधारित राजनीति ने प्रदेश को माफिया राज में परिवर्तित अवश्य कर दिया है।

आगे उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी की अगुवाई में वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी के नारे मैं लड़की हूँ लड़ सकती हूँ का जनता पर बड़ा ही सकारात्मक असर है और लोग वर्तमान सरकार के तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर कांग्रेस के घोषणा पत्र से प्रभावित हैं।

एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास रहा है कि उसने जनता से जो भी वादा किया है उसे पूरा किया है चाहे 2009 के घोषणा पत्र में किसान कर्ज माफी की बात हो या फिर उत्तर प्रदेश के बगल वाले छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी सरकार द्वारा 25 रुपये किलो किसानों के धान खरीद का वादा हो,कांग्रेस ने जो कहा वह पूरा करके दिखाया है।

पत्र प्रतिनिधियों के इस सवाल पर की चुनाव में जीत मिलने के बाद वह क्षेत्र में क्या करना चाहेंगी,पर जबाब देते हुए कहा कि वैसे तो हमारा विधानसभा क्षेत्र दुद्धी आदिवासी बहुल इलाका है और यहां समस्याओं का अंबार है।यहां के आदिवासी समाज में शिक्षा की कमी है जिसके चलते उन्हें रोजगार के लिए संघर्ष करना पड़ता है।अनपढ़ आदिवासी मजदूरी कर अपने जीविकोपार्जन के लिए विवश हैं स्व रामप्यारे पनिका ने यहां के विकास के लिए बहुत कुछ सोच रखा था पर उनके निधन के बाद जो भी लोग राजनीति में इन आदिवासियों के रहनुमा बने सबने इन्हें ठगा। मैं जीत के बाद इस क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समाज के विकास के लिए जो स्व रामप्यारे पनिका की सोच थी उसी पर आगे बढ़ते हुए उनके अधूरे रह गए सपनों को पूरा करने का प्रयास करूँगी।

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