Monday, May 23, 2022
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सोनभद्र पुलिस : बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया

अगर वाइरल पुलिस वसूली सूची को ही सच मान ले , साथ ही यह भी मान ले सोनभद्र की पुलिस आम जनता से न तो प्राथिमिकी दर्ज करने ,गाड़ी के पकड़ कर छोड़ने , कब्जा कराने का एक भी पैसा हराम समझती हैं और छूती भी नहीं है जो कि सच नहीं है ,के बाद भी अगर साल के पीछे 3 से चार करोड़ कमाती है ,तो प्रदेश में तैनात अन्य दरोगा , कोतवाल , यही सोचते होंगें की जीवन मे कम से कम एक बार एक ही साल के लिए ही सही सोनभद्र में पोस्टिंग मिल जाय ।ऐसा नहीं है कि सिर्फ थानेदार या कोतवाल इस एग्जाई वसूली के अकेले हिस्सेदार है , सूत्रो की माने तो क्षेत्राधिकारी से लेकर डी आई जी तक इस रकम की बन्दर बाट होती हैं । अब तो लोग बाग अब यह भी सवाल उठा रहे हैं कि बाबा का बुलडोजर कही रकम बढ़ाने के लिए तो नहीं गरजा था ?

सोनभद्र । सोशल मीडिया पर शक्तिनगर थाने में चल रही अवैध वसूली की एक सूची तेजी से वायरल हो रही है। उस वायरल सूची ने जहाँ ख़ाकी को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है वहीं दूसरे खाकी वर्दी वाले इस जनपद की पोस्टिंग के लिए लालायित नजर आने लगे हैं ,लोग तो अब कहने लगे हैं कि यह भी हो सकता है कि लाइन में लगे कोतवाल ने ही इस वसूली लिस्ट को वाइरल करवाया हो।

कहने को तो सोनभद्र नक्सल प्रभावित जनपद है, लेकिन यहां तैनात दरोगाओं को नक्सल प्रभावित इलाकों में ड्यूटी करना काले पानी सजा समझ में आती हैं और सभी रोड के थानों की तैनाती चाहते हैं। हाइवे पर 2 फुट ही सही लेकिन इलाका होना चाहिए जैसे हाथीनाला थाना । हाइवे पर कुछ नहीं तो हजारों की तादात में निकल रहे वाहनों की इंट्री ही लाखों की होती हैं तो चोपन ओबरा और डाला से क्रशर उधोग इन थानों के लिए कामघेनु बन जाते है। एडीजीपी लॉ एन्ड ऑर्डर प्रशान्त कुमार केसोनभद्र में तैनाती के दरम्यान एक क्षेत्राधिकारी को इस लिए अपनी सर्किल से हाथ धोना पड़ा था कि उनके पुत्र की बिल्डिंग मैटेरियल की इलाहाबाद स्थिति दुकान पर सोनभद्र के क्रशरों और बालू की साइटों से प्रति साइट /क्रशर एक ट्रक गिट्टी -बालू वसूली जाती थी ।

नौकरी में शीर्ष पद पर पहुंचने की हर किसी की लालसा होती है, उसी प्रकार सोनभद्र में तैनाती के दौरान हर इंस्पेक्टर, दरोगा व सिपाही की ख्वाइश होती है कि वह कुछ महीनों के लिए ही सही शक्तिनगर, अनपरा, रेनुकूट, बीजपुर, डाला, चोपन व ओबरा में पोस्ट हो जाय । उक्त थानों-चौकियों पर पोस्ट होने वाले पुलिसकर्मी इसे किसी मेडल से कम नहीं समझते ।

यूँ तो पूर्व के दिनों में नक्सल फ्रंट पर बेहतर काम करने के कारण कई पुलिस कर्मियों को प्रमोशन के साथ सम्मान भी मिला । मगर नक्सल फ्रंट पर कोई काम नहीं करना चाहता। सोनभद्र आते ही इंस्पेक्टर से लेकर दरोगा व सिपाही जुगाड़ में लग जाते हैं ।
क्यों हर पुलिस कर्मी शक्तिनगर, अनपरा, रेनुकूट, बीजपुर, डाला, चोपन व ओबरा में ही नौकरी करना चाहता है, इसे लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं ।

कानपुर के रक्षक जन मोर्चा पार्टी के पारुल यादव ने ट्विटर पर एक वसूली का लिस्ट जारी किया है । साथ में मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने लिखा कि किस तरह शक्तिनगर पुलिस भ्रष्टाचार में लिप्त होकर हर महीने लाखों रुपये वसूली कर रही है । एड0 पारुल यादव ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है ।

पारुल यादव द्वारा अपने ट्विटर में जो वसूली सूची टैग किया है, उस सूची के मुताबिक शक्तिनगर थाना द्वारा कुल 17 जगहों से वसूली की जाती है । पारुल ने बाकायदा नाम और वसूली की है रही रकम सहित सूची जारी की है।

हाथ से लिखे इस सूची के मुताबिक राजाराम कबाड़ी से एक लाख, मुनीब कबाड़ी से एक लाख, सलीम कबाड़ी से 75 हजार, योगेंद्र कबाड़ी से 50 हजार, सत्यांश मिश्रा कबाड़ी से 65 हजार, डीजल चोरी करने वाले कथित मुर्तजा खान से एक लाख, मुकेश से एक लाख, चंदू से एक लाख, बाबू अंबेडकर नंबर से बीस हजार, कोयला चोरी करने वाले कथित रवींद्रनाथ चौबे से डेढ़ लाख, एसटीएफ के निशाने पर आए गिरोह के नायडू से एक लाख, राजेश बैसवार से एक लाख, गांजा तस्करी कराने वाले कथित अंब्रेश पांडेय से दो लाख, आउटसोर्सिंग कंपनियों में बीजीआर से एक लाख, वीपीआर से एक लाख, पीसी पटेल से 75 हजार, एसए यादव से पचास हजार, पीएस कंस्ट्रक्शन से पांच लाख, कोल ट्रांसपोर्टर आरटीएल से एक लाख, बीआरएसी से दस हजार, ओम से पचास हजार, यूनाइटेड से पचास हजार, प्रीती मोटर से बीस हजार, दो पेट्रोल टंकी से बीस-बीस हजार वसूल की जाती है ।

अब सवाल यह उठता है कि क्या इस वाइरल वसूली लिस्ट के बहाने ही सही क्या कोई गोपनीय जांच पूरे सोनभद्र की होंगी यदि हाँ तो क्या इस वसूली के लिएकेवल थानेदारों को ही जिम्मेदार मान कर उनका ट्रांसफर ,लाइनहाजिर कर मामले को निपटा दिया जाएगा कि उच्च पदों पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी भी इसकी जद में आयेंगे ।जांच उनकी भी होनी चाहिए जो कभी यहाँ थानेदार तो कभी कोतवाल और कभी क्षेत्राधिकारी के पदों को सुशोभित कर रहे हैं ।

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