Monday, May 23, 2022
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शासन ने जारी की प्रदेश में स्कूल चलो अभियान की प्रगति रिपोर्ट, सोनभद्र फिसड्डी,अध्यापक देते रहे उच्च तापमान का हवाला

सोनभद्र । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र के लिए प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए 4 अप्रैल को श्रावस्ती जिले से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत करते हुए सभी अधिकारियों व शिक्षकों से अपील की थी कि वे प्रयास कर नामांकन से छूटे- सभी बच्चों को स्कूल से जोड़े और और उनका नामांकन कराएं तथा शिक्षा की गुडवत्ता पर भी ध्यान दें।परन्तु एक महीने बाद प्राथमिक शिक्षा पर शासन ने जो प्रगति रिपोर्ट जारी की है उसे देखकर लगता है कि सोनभद्र एक बार फिर फिसड्डी ही निकला।आपको बताते चलें कि स्कूल चलो अभियान की प्रगति रिपोर्ट जो शासन ने जारी किया है उस प्रगति रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी प्रथम व जौनपुर द्वितीय स्थान पर है, वहीं जनपद सोनभद्र 57वें नम्बर पर है।




स्कूल चलो अभियान का आगाज करते सदर विधायक

स्कूल चलो अभियान के पहले दिन सोनभद्र में जिस तरह से तैयारियां देखी गयी उसे देखकर इस बार लग रहा था कि शायद अबकी बार विद्यालयों की तस्वीर बदलेगी । पहले दिन जिस तरह से बच्चों को सम्मानित किया गया और जनप्रतिनिधि खुद मिड डे मील चखे और खुद अपने हाथों से बच्चों को खिलाया यह किसी सपने सरीखा लग रहा था ।




लेकिन जैसे जैसे समय गुजरता गया सरकारी स्कूल अपने पुराने ढर्रे पर चल पड़े । अध्यापकों के स्कूल न जाने अथवा समय से स्कूल न खुलने व बच्चों को घटिया खाना दिए जाने की शिकायतें मिलने लगी ।यह मीडिया रिपोर्ट नहीं अपितु विभिन्न सरकारी एजेंसियों की जांच रिपोर्ट में यह सब सामने आया है जैसे कि सोनभद्र के मुख्यविकास अधिकारी के लगातार प्राथमिक स्कूलों की जांच में बच्चों की उपस्थिति कम पाई जाने लगी ,इसके बाद उन्होंने कम उपस्थित वाले विद्यालयों के अध्यापकों के वेतन आहरण पर 80 प्रतिशत उपस्थित होने तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

यहां आपको बताते चलें कि जिले में बाल संरक्षण आयोग के एक दिवसीय दौरे पर जिला मुख्यालय से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर स्थित एक विद्यालय की जांच के बाद कलेक्ट्रेट सभागार में पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उक्त प्राथमिक विद्यालय देखकर उन्हें लगा कि क्या इस हाल में है सरकारी स्कूल ?उन्होंने बताया कि इससे बुरी हालत की कल्पना भी नही की जा सकती।

इधर सोनभद्र में अध्यापक 45 डिग्री तापमान का हवाला देकर अपनी नाकामी छिपाते रहे वहीं इसी तापमान में काम करते हुए बगल के जिला वाराणसी, जौनपुर, चंदौली व मिर्जापुर ….नए नामांकन व बच्चों की उपस्थिति में सोनभद्र से कहीं आगे निकल गए। इतना ही नहीं सोनभद्र में अध्यापक पुराने बच्चों को भी स्कूल नहीं ला सके । जिसकी वजह से उपस्थिति काफी कम मिलती रही ।

यहां आपको बताते चलें कि सोनभद्र में जिस तरह से टीचरों के अटैचमेंट से लेकर स्कूल न आने के लिए खेल खेला जा रहा है इससे न सिर्फ सोनभद्र का नाम बदनाम हो रहा है बल्कि सोनभद्र को चारागाह समझने वाले अधिकारी व शिक्षक यहां के बच्चों के भविष्य को भी खराब कर रहे हैं और जब तक ऐसे खेल को नहीं रोका जाएगा तब तक आप किसी भी बेहतर रिजल्ट की उम्मीद नहीं कर सकते ।

यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि इसके लिए जरूरी है जनप्रतिनिधियों को आगे आने की । सिर्फ उद्घाटन कर चले जाने से काम नहीं चलेगा । जरूरत है इसकी समय समय पर मॉनिटरिंग करने की । तभी पढ़ेंगे बच्चे-बढ़ेंगे बच्चे का नारा साकार हो सकेगा । फिलहाल ऐसा लगने लगा है कि सरकारी कवायद सिर्फ स्कूलों के कायाकल्प तक सिमट के रह गयी है और जनप्रतिनिधि भी बड़े गर्व से कहते फिर रहे हैं कि अब देखिए स्कूल चमक रहे हैं ।जनाब स्कूल की बिल्डिंग चमकने से क्या होगा ? बच्चे स्कूल में अपना भविष्य बनाने जाते हैं न कि बिल्डिंग का स्वरूप देखने ? प्राथमिक स्कूल की शिक्षा ही किसी भी व्यक्ति के भविष्य की शिक्षा का आधार होती है और यदि यही कमजोर हो गयी तो उस व्यक्ति का भविष्य क्या होगा ?इस पर भी विचार करने का समय आ गया है।स्कूल के कायाकल्प नही अपितु गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से देश का भविष्य बदल सकता है।




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