Wednesday, January 19, 2022
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क्या स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता कि सोनभद्र का जिलाधिकारी कौन है ?

सोनभद्र के स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया दिवस के अवसर पर जारी पोस्टर में जिलाधिकारी का नाम अभिषेक सिंह छपा है जबकि सोनभद्र के जिलाधिकारी टी के शिबू हैं।

सोनभद्र। मौका था स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया दिवस मनाए जाने का जिसमे उक्त बीमारी से बचाव कैसे किया जाय के सम्बंध में आम जन को जागरूक करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जो पोस्टर जारी किए हैं उसमें जिलाधिकारी का नाम अभिषेक सिंह लिखा हुआ है जबकि वर्तमान में सोनभद्र के जिलाधिकारी टी के शिबू हैं तो क्या सोनभद्र के जिलाधिकारी का नाम स्वास्थ्य विभाग को नहीं पता है या फिर कारण कुछ और ही है ?

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दीवालों पर जगह जगह चिपकाए गए इन पोस्टरों को देखकर सोनभद्र के लोग आपस में ही बात चीत करते नजर आए।कुछ लोगो ने तो यहाँ तक कहा कि भाई पिछला वाला पोस्टर होगा जो इस बार प्रयोग में आ गया होगा।तो इस बात पर कुछ लोगों ने कहा कि सवाल तो यह भी है कि इस बार के प्रचार प्रसार के मद में आये हुए धन का क्या हुआ?

यहां सवाल यह भी है कि क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने यह पोस्टर नहीं देखा ? और यदि देखा तो क्या उसे यह समझ मे नही आया कि सोनभद्र में तो जिलाधिकारी बदल गए हैं और लगभग महीने भर पूर्व ही नए जिलाधिकारी का जनपद में आगमन हो चुका है तो आम जन मानस में यह सवाल उठना लाजिमी भी है कि सोनभद्र का स्वास्थ्य विभाग अपने कर्तव्यों के प्रति कितना संजीदा है?

यह मामला पोस्टर पर जिलाधिकारी का नाम गलत छपने भर का नहीं अपितु स्वास्थ्य विभाग की संजीदगी व उसके अपने कर्तव्यों के प्रति वह कितना सम्बेदनशील है इस बात से भी जुड़ा हुआ है।जिस विभाग पर लोगो की जिंदगी बचाने का जिम्मा है उसकी सम्बेदनशीलता पर इस तरह से उठते सवाल लोगों को सरकार व उसकी मशीनरी पर से उठते विश्वास को और अधिक गहरा कर सकती है जो आने वाले समय में विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा पर भारी पड़ सकती है।

अभी स्वास्थ्य की लापरवाही की वजह से म्योरपुर विकास खण्ड में लगातार मासूमों की हो रही मौतें अखबार की सुर्खियां बटोर रही हैं तो दूसरी तरफ आज फाइलेरिया से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी पोस्टर पर पूर्व जिलाधिकारी का नाम छपवा देने से उसके संजीदगी पर उठते सवाल से स्वास्थ्य विभाग की साख पर सवाल उठना लाजिमी है।अब लोग बाग यह कहते फिर रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग को लगता है कि कुछ ऐसे लोग चला रहे हैं जिनका लोगों की सेहत से ज्यादा अपने हित की चिंता अधिक है शायद यही वजह है कि विभाग के इतनी बड़ी गलती पर किसी की नजर नहीं गयी। लोगों के बीच से अब यह आवाज उठाने लगी है कि जिस विभाग पर लोगो के बीमारी के इलाज का जिम्मा है उसके बीमारी का इलाज आखिर कौन करेगा ?क्या निकट भविष्य में वेंटिलेटर पर चले गए स्वास्थ्य विभाग का इलाज हो पायेगा अथवा नहीं ?

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