सोनभद्र के ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा केंद्रों के संचालन के लिए दो सेवा प्रदाताओं का होगा चयन
जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी ने जारी की निविदा, ग्रामीण क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो केंद्र और शहरी क्षेत्र में 10 हजार की आबादी पर एक केंद्र का प्रावधान.........

सोनभद्र। विंध्यलीडर संवाददाता । जिले में नागरिकों को सरकारी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने के लिए संचालित जनसेवा केंद्रों की व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी, सोनभद्र की ओर से जिले में जनसेवा केंद्रों की स्थापना और संचालन के लिए दो जिला सेवा प्रदाताओं के चयन की निविदा जारी की गई है। जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल पर भी इसकी सूचना प्रकाशित की गई है।
जारी दस्तावेज के अनुसार यह प्रक्रिया जनसेवा केंद्र व्यवस्था के चौथे चरण के तहत होगी। चयनित सेवा प्रदाता जिले में पहले से संचालित केंद्रों के संचालन के साथ आवश्यकता के अनुसार नए केंद्र स्थापित कराने, केंद्र संचालकों का चयन करने, उन्हें प्रशिक्षण देने और सरकारी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक जिले में दो जिला सेवा प्रदाताओं का चयन किया जाना है।
जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी ने जारी की निविदा, ग्रामीण क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो केंद्र और शहरी क्षेत्र में 10 हजार की आबादी पर एक केंद्र का प्रावधान
प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो केंद्र का प्रावधान
नई व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया है। दस्तावेज के मुताबिक प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो जनसेवा केंद्र संचालित किए जाने का प्रावधान है। इनमें से एक केंद्र ग्राम सचिवालय में स्थापित और संचालित किया जाना है। यहां पंचायती राज विभाग के साथ अन्य सरकारी विभागों की सेवाएं भी नागरिकों को उपलब्ध कराई जाएंगी।
वहीं शहरी क्षेत्रों में 10 हजार की आबादी पर कम से कम एक जनसेवा केंद्र संचालित करने का प्रावधान किया गया है। चयनित सेवा प्रदाता को समझौता होने के बाद निर्धारित केंद्रों को चार माह के भीतर स्थापित और संचालित करना होगा। केंद्रों की सेवा गुणवत्ता का आकलन करने के लिए प्रदर्शन आधारित व्यवस्था और नागरिकों से प्रतिक्रिया लेने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
सरकारी सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर मिलेगा माध्यम
जनसेवा केंद्रों को सरकार और नागरिकों के बीच सेवा उपलब्ध कराने के प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित करने की योजना है। दस्तावेज में भूमि अभिलेख, रोजगार संबंधी जानकारी, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों, पेंशन, छात्रवृत्ति और ग्राम पंचायतों से संबंधित विभिन्न जानकारियों को भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय, तहसील, ब्लॉक अथवा अन्य सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना है।
केंद्र संचालक बनने के लिए 10वीं पास होना जरूरी
नए जनसेवा केंद्र संचालक के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। शैक्षिक योग्यता कम से कम 10वीं पास रखी गई है। आवेदक को स्थानीय भाषा पढ़ने-लिखने के साथ कंप्यूटर के सामान्य संचालन की जानकारी और बुनियादी अंग्रेजी का ज्ञान होना चाहिए। कंप्यूटर का पर्याप्त ज्ञान नहीं होने की स्थिति में चयनित केंद्र संचालक को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सेवा प्रदाता की होगी।
मौजूदा जनसेवा केंद्र, साइबर कैफे और कंप्यूटर केंद्र संचालकों को प्राथमिकता देने का भी प्रावधान किया गया है।
हालांकि यह निविदा सीधे किसी व्यक्ति को जनसेवा केंद्र आवंटित करने के लिए नहीं है। पहले जिला सेवा प्रदाता का चयन होगा। इसके बाद चयनित सेवा प्रदाता निर्धारित मानकों के आधार पर केंद्र संचालकों का चयन करेगा।
केंद्र संचालकों से निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क नहीं ले सकेगा सेवा प्रदाता
निविदा में जनसेवा केंद्रों के पंजीकरण और नवीनीकरण शुल्क की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। श्रेणी के अनुसार शहरी केंद्रों के लिए यह शुल्क एक हजार से दो हजार रुपये तथा ग्रामीण केंद्रों के लिए 500 से एक हजार रुपये वार्षिक तक निर्धारित है। इससे अधिक शुल्क लेने पर सेवा प्रदाता के खिलाफ अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई का प्रावधान है।
केंद्र संचालक से सुरक्षा राशि लेने का भी प्रावधान है। दस्तावेज के अनुसार अनुबंध समाप्त होने के बाद निर्धारित शर्तों के तहत यह राशि वापस की जानी है। केंद्र के नियमित मासिक खर्च की जिम्मेदारी केंद्र संचालक की होगी।
सरकारी सेवा के शुल्क में केंद्र संचालक की हिस्सेदारी तय
सरकारी सेवाओं के लिए निर्धारित 30 रुपये के उपयोगकर्ता शुल्क के उदाहरण में केंद्र संचालक और सेवा प्रदाता की संयुक्त हिस्सेदारी 15 रुपये रखी गई है। इसमें विभाग की हिस्सेदारी तीन रुपये, जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी की 10 रुपये और केंद्र ई-गवर्नेंस की दो रुपये बताई गई है।
वित्तीय चयन प्रक्रिया में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्र संचालक को मिलने वाली हिस्सेदारी 15 रुपये में कम से कम 11 रुपये होनी चाहिए। इससे कम हिस्सेदारी की बोली स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिला सेवा प्रदाता बनने के लिए तीन वर्ष का अनुभव जरूरी
निविदा में भाग लेने वाली संस्था का पंजीकृत कंपनी, साझेदारी फर्म, सीमित दायित्व वाली साझेदारी अथवा सोसाइटी होना जरूरी है। संस्था कम से कम तीन वर्ष से संचालित होनी चाहिए और उसके पास सूचना प्रौद्योगिकी अथवा ई-शासन से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने का अनुभव होना चाहिए।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों में संस्था का औसत वार्षिक कारोबार एक जिले के लिए कम से कम तीन करोड़ रुपये होना चाहिए। यदि कोई संस्था एक से अधिक जिलों के लिए चयनित होती है तो प्रत्येक जिले के हिसाब से न्यूनतम औसत कारोबार की शर्त लागू होगी।
पांच लाख रुपये की जमानत राशि
निविदा में प्रत्येक जिले के लिए पांच लाख रुपये की जमानत राशि निर्धारित की गई है। निविदा दस्तावेज की गैर-वापसी योग्य फीस 20 हजार रुपये तथा वस्तु एवं सेवा कर अतिरिक्त निर्धारित है। चयनित सेवा प्रदाता को जिले की श्रेणी के अनुसार 10 लाख, 15 लाख अथवा 20 लाख रुपये की कार्य निष्पादन बैंक गारंटी भी देनी होगी।
तकनीकी मूल्यांकन के लिए अधिकतम 100 अंक निर्धारित किए गए हैं। तकनीकी बोली में कम से कम 65 अंक प्राप्त करने वाले संस्थानों की ही वित्तीय बोली खोली जाएगी। मूल्यांकन में विभिन्न राज्यों में केंद्र संचालन का अनुभव, नागरिक केंद्रित परियोजनाओं का अनुभव, उत्तर प्रदेश में सरकारी सेवाओं के वितरण का अनुभव और पिछले तीन वर्षों का औसत कारोबार प्रमुख आधार होंगे।
17 अक्टूबर तक जमा करनी होगी बोली
जारी समय-सारणी के अनुसार निविदा 22 सितंबर 2026 को प्रकाशित की गई। इच्छुक संस्थाएं 30 सितंबर शाम पांच बजे तक निविदा से संबंधित स्पष्टीकरण मांग सकती हैं। स्पष्टीकरण का जवाब छह अक्टूबर को जारी किया जाएगा। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर 2026 शाम पांच बजे निर्धारित है। तकनीकी बोलियां 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे जिला ई-गवर्नेंस सोसाइटी कार्यालय, कलेक्ट्रेट परिसर, सोनभद्र में खोली जाएंगी। वित्तीय बोली खोलने की तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
तीन वर्ष तक संचालन की जिम्मेदारी
चयनित सेवा प्रदाता को समझौते की तारीख से अधिकतम तीन वर्ष तक जनसेवा केंद्रों की स्थापना, संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाएगी। आपसी सहमति और प्रदेश सरकार की स्वीकृति के बाद अनुबंध को दो वर्ष तक बढ़ाए जाने का प्रावधान भी रखा गया है ।

