Thursday, December 8, 2022
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राजस्व लॉकअप में मौत की हो मजिस्ट्रेट्रियल जांच—–विकाश शाक्य

सोनभद्र। राजस्व बंदी गृह में बन्द बाक़ीदर सुधाकर दुबे की मौत मानवाधिकार का हनन है, दोषियों को सजा दिलाने के लिए पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के विकास शाक्य ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच कराए जाने की मांग की है।अधिवक्ता शाक्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि राबर्ट्सगंज धर्मशाला चौक निवासी सुधाकर दुबे जो बैंक से कर्ज लिए थे, कोरोना काल मे कर्ज का चुकता नहीं कर पाने के कारण बैंक ने वसूली के लिए तहसील रावटसगंज को वसूली पत्र जारी किया था, जिस पर तहसीलदार एवं संग्रह अमीन सुधाकर दुबे को विगत कई दिन पूर्व से ही पकड़ कर अपनी अभिरक्षा में राबर्ट्सगंज तहसील के राजस्व बंदी गृह में बंद कर दिए थे।

अधिवक्ता ने पत्र में लिखा है कि राजस्व बंदी गृह में भीषण गर्मी के मद्देनजर कोई सुविधा नहीं थी और न ही बंदियों के खाने एवं पानी पीने की कोई व्यवस्था है ।ऊपर से बकाया धनराशि चुकता नहीं करने पर प्रतिदिन क्रूरता एवं अमानवीय व्यवहार से सुधाकर दुबे के हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती चली गई अंतोगत्वा स्थिति गंभीर हो जाने पर परिजनों को इलाज कराने के लिए बोल कर जिला प्रशासन अपने दायित्व से निवृत हो गई जिसके परिणाम स्वरूप राजस्व बंदी की मौत हो गई ।

उन्होंने आरोप लगाया है कि तहसील प्रशासन का यह कृत्य अमानवीय है। इस घटना से समाज में दहशत का माहौल है ।उन्होंने दूर्व्यवस्था एवं अमानवीय कृत्य से बंदी की मौत पर मजिस्ट्रेटियल जांच के लिए जिला अधिकारी को पत्र सौंपकर तत्काल कार्यवाही की मांग की है । शाक्य ने कहा कि अगर प्रशासन कार्यवाही नहीं करती है तो संगठन विधिक कार्यवाही करने के लिए न्यायालय का सहारा लेगी।

राजस्व बन्दीगृह में बंदी की मौत प्रकरण पर उपजिलाधिकारी सदर ने बताया कि बाक़ीदार को बन्दीगृह में रखा गया था ,उसकी तबियत बिगड़ने पर उसके घरवालों को बुलाकर उनके साथ उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया जहाँ इलाज के बाद ऊसर चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया।उसके बाद उसकी मौत हो गयी।फिलहाल बाक़ीदार की मौत के प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए उनके तरफ से जिलाधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है।

उक्त प्रकरण पर तहसीलदार राबर्ट्सगंज ने कहा कि बन्दीगृह में सामान्य रूप से सारी व्यवस्था मौजूद है जैसे गर्मी के मौसम के लिए पंखा, पीने का पानी व सौचालय आदि।इसलिए यह आरोप निराधार है कि राजस्व बन्दीगृह में एक कैदी के लिए अनुमन्य सुविधाओं का अभाव है।




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