अष्टोत्तरशतनाम, से मां दुर्गा होती हैं प्रसन्न, देवी के 108 नामों को क्या कभी आपने नवरात्रि में पढ़ा है ?
नवरात्रि में सभी लोग मां दुर्गा की अराधना अपने अपने तरीके से करते हैं और मां के कई नामों का जाप करते हैं। आज हम भी आपको मां दुर्गा के 108 नामों के बारे में बताएंगे।

आचार्य कृपाशंकर पाण्डेय
सोनभद्र । नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत महत्वपूर्ण है। सभी लोग कलश स्थापना कर ली है तो इसका पाठ जरूर करना चाहिए, इसमें मां दुर्गा के कवच से लेकर कई स्रोत्र हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसके पाठ से मां प्रसन्न होती हैं। इसमें ही जिक्र है अष्टोत्तरशतनाम का, जिसमें मां भगवती के 108 नामों के बारे में बताया गया है। शंकर जी इन्हें माता पार्वती से बताया था। उन्होंने कहा था कि अष्टोत्तरशतनाम के बारे में तुम्हें मैं आज बता रहा हूं।

इसके सुनने मात्र और प्रसाद (पाठ या श्रवण) -मात्र से परम साध्वी भगवती दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा में कलश स्थापना की जाती है। इस दिन मां की स्थापना कर मां 108 नामों को जाप करना चाहिए। इस बार पंचांग के अनुसार 10 अक्टूबर 2026 की रात 09:19 बजे से प्रारंभ होगी और 11 अक्टूबर 2026 को रात 09:30 बजे तक रहेगी। आज प्रात:काल मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक है। इसके बाद अभिजित मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इन दोनों में कलश स्थापना की जा सकती है। 1.-ॐॐ सती, 2.-साध्वी, ३- भवप्रीता, 4.भवानी, 5.भवमोचनी , 6.आर्या,7.दुर्गा, 8.जया, 9.आद्या, 10 त्रिनेत्रा, 11-शुलधारिणी, 12.पिनाकधारिणी, 13. चित्रा, 14.चण्डघण्टा , 15.महातपा , 16.मन (मननशक्ति), 17.लुद्धि , 18.अहंकारा, 19.चित्तरूपा,20.चिता, 21.चिति (चेतना), 22. सर्वमन्त्रमयी, 23.सत्ता (सत्-स्वरूपा), 24.सत्यानन्दस्वरूपिणी, 25.अनन्ता ,26.भाविनी, 27. भाव्या , 28.भव्या (कल्याणरूपा), 29.अभव्या, 30.सदागति, 31.शाम्भवी (शिवप्रिया), 32.देवमाता, 33.चिन्ता, 34.रत्नप्रिया, 35.सर्वविद्या, 36. दक्षकन्या, 37.दक्षयज्ञविनाशिनी, 38.अपर्णा , 39.अनेकवर्णा , 40.पारला ,41. पाटलावती ,42.पदट्राम्बरपरीधाना , 43.कलमंजीररंजिनी, 44.अमेयविक्रमा ,45-क्रूरा , 46. सुन्दरी, 47. सुरसुन्दरी, 48.वनदुर्गा,49.मातंगी,50.मतंगमुनिपूजिता, 51-ब्राह्मी, 52. माहेश्वरी, 53.ऐन्री, 54.कौमारी, 55.- वैष्णवी, 56.चामुण्डा, 57.वाराही, 58.लक्ष्मी, 59.पुरुषाकृति 60.विमला, 61.उत्कर्षिणी, 62.ज्ञाना, 63.क्रिया, 64.नित्या, 65.बुद्धिदा,66.बहुला, 67. बहुलप्रेमा, 68. सर्ववाहनवाहना, 69.निशुम्भ-शुम्भहननी,70.महिषासुरमर्दिनी, 71.मधुकैटभहन्त्री, 72.चण्डमुण्डविनाशिनी, 73. सर्वासुरविनाशा, 74.सर्वदानवघातिनी, 75.सर्वशास्त्रमयी, 76.सत्या, 77.सर्वास्त्रधारिणी,78.अनेकशस्त्रहस्ता, 79.अनेकास्त्रधारिणी, 80.कुमारी, 81.एककन्या, 82.कैशोरी,83.युवती, 84.यति, 85.-अप्रौढा, 86.प्रोढा, 87.वृद्धमाता, 88.बलप्रदा, 89.होदरी, 90.मुक्तकेशी, 91.घोररूपा,92.महाबला, 93.अग्निज्वाला, 94.रोद्रमुखी,95.कालरात्रि, 96.तपस्विनी, 97.नारायणी, 98.भद्रकाली, 99.विष्णुमाया, 100. जलोदरी,101.शिवदूती, 102.-कराली, 103.अनन्ता ,104.परमेश्वरी, 105.कात्यायनी, 106.सावित्री, 107.प्रत्यक्षा, 108 ब्रह्मवादिनी ।
यदि आप अपना कोई मनोकामना पूरा करना चाहते हैं तो आप इन नामों का पाठ करें ,मां भगवती अवश्य प्रसन्न होंगी और आपकी सभी मनोकामना पूरी करेगी ।
विंध्यलीडर उपरोक्त लेखन सामग्री की पुष्टि नहीं करता है, यह विद्वान लेखक का विचार हैं । आप अपने क्षेत्र के सम्बंधित विषय के विशेषज्ञ से इसकी पुष्टि कर लें ।

