Saturday, January 22, 2022
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स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने पत्रकार से की हाथापाई,पीड़ित पत्रकार बैठा धरने पर

वर्तमान सरकार में लगातार हो रहे पत्रकारों पर हमले ।योगी सरकार में बेलगाम अधिकारी उनके रास्ते मे रोड़ा बन रहे पत्रकारों के साथ लगातार कर रहे बद्तमीजी।सरकार पत्रकारों के हो रहे लगातार शोषण पर मौन।

सोनभद्र।पिछले कुछ दिनों से सोनभद्र का स्वास्थ्य विभाग सुर्खियों में है,कारण म्योरपुर ब्लाक के मकरा सेंदुर गांव में मलेरिया बुखार से लगातार हो रही मौतें। इसी बात को लेकर तथा मौतों के कारण पर मुख्यचिकित्साधिकारी के आवासीय कैम्प कार्यालय पर वर्जन लेने गए पत्रकार से स्वास्थ्य कर्मियों ने वहीं पर हाथापाई शुरू कर दी।पीड़ित पत्रकार राजन चौबे आज जब उक्त बात पर शिकायती प्रार्थना पत्र देकर मुख्यचितसाधिकारी व उनके चहेते उन कर्मचारियों की जिन्होंने पत्रकार के साथ हाथापाई की हुई थी ,की जांच कराकर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के बाबत बात करने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने भी पत्र प्रतिनिधियों से कहा कि पत्रकारों को भी किसी अधिकारी से पूछ कर ही बाइट लेने जाना चाहिए।

सवाल तो यह है कि जब सी एम ओ साहब अपने कार्यकाल में कभी कभार ही अपने कार्यालय पर बैठते हैं तथा सभी काम काज अपने आवासीय कैम्प कार्यालय से ही निपटाते हैं ऐसे में पत्रकार यदि उनके कैम्प कार्यालय उनका वर्जन लेने चला गया तो क्या उससे गुनाह हो गया?वर्तमान समय मे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पूरा सरकारी ही पत्रकारों की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध है क्योंकि पत्रकार हमेशा से उनके कार्यकलापों पर सवाल उठाते आये हैं।वर्तमान में सोनभद्र का पूरा सरकारी अमला ही सेंदुर मकरा गांव में लगातार हो रही मौतों पर उठते सुलगते सवालों से अपना पल्ला झाड़ने और उस पर पानी डालने में लग गया है।

यही वजह है कि इतनी मौतों के बाद भी प्रशासनिक अमला हालात को सामान्य दिखाने में लगा हुआ है।आपको बताते चलें कि पिछले पखवाड़े भर में लगभग दो दर्जन मौतों ने पूरे गांव को झकझोर दिया है तथा ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है।यहाँ यह भी विचारणीय है कि यदि समय रहते सेंदुर मकरा गांव में स्वास्थ्य विभाग संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिया होता तो समस्या इतनी न बढ़ती और गरीब आदिवासियों की इतनी बड़ी संख्या में मौत भी न हुई होती।इतना ही नहीं अभी भी मौतों का सिलसिला जारी है कारण वही है कि स्वास्थ्य विभाग व पूरा सरकारी अमला ही मौत के असली कारण को झुठला रहे हैं।शायद इन मासूमों की लगातार हो रही मौतों के असली कारण को स्वीकार कर यदि सही दिशा में इलाज किया जय तो मौतों का सिलसिला बन्द हो सकता है।

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