Monday, May 20, 2024
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लोक निर्माण विभाग बौरहा की गाय हो गई जिसे जब और जैसे चाहा दुह लिया गया

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(समर सैम)

भ्रष्टाचारियों का ये नारा है भरो तिजोरी चांदी की, और जय बोलो महात्मा …….की।।

लोकनिर्माण विभाग शासनादेश के इतर जाकर टेंडर प्रक्रिया को अपने चहेतों के पक्ष में करने के लिए हर जतन करने पर आमादा है।आपको बताते चलें कि जिला खनिज न्यास मद से कराए जाने वाले कार्यो को कराए जाने के लिए निकली गयी निविदाओं में व्यापक पैमाने पर नियमों को तोड़ मरोड़ कर उनका मिस यूज़ किया जा रहा है। इसी मद से होने वाले कार्यों में खेल खेला जा रहा है। माल ए मुफ़्त, दिल ए बेरहम लूट मचाये हुए हैं।

यहां आपको बताते चले कि डीएमएफ से कराये जाने वाले कार्यों की निकली गयी निविदाओं में से अधिकांश की अंतिम तिथि दिनांक 22 अक्टूबर 2022 दोपहर 12 बजे तक ही निर्धारित किया गया था। टेंडर मैनेज करने के लिए दिन रात बैठक एवं रणनीति बनाई जा रही थी। पर निर्धारित तिथि तक टेंडर मैच सही से फ़िक्स न होने के कारण ही सम्भवतः टेंडर की तिथि अचानक बढ़ा दी गई और टेंडर की शर्तों में भी मनमाफिक परिवर्तन कराए गए और माननीय महामंडलेश्वर ने रेफ़री की भूमिका में मैदान में मोर्चा संभाला।

मामला जब मीडिया की सुर्खियां बनने लगी तो एक बार फिर से निविदाओं की तिथियों को बढ़ा दिया गया। अधीक्षण अभियंता मिर्जापुर वृत लोक निर्माण विभाग को दिनांक 21अक्टूबर 2022 को एक शुद्धि पत्र जारी करना पड़ा। जिसमें सूचित करना पड़ा कि अपरिहार्य कारणों से आमंत्रित निविदाओं की तिथि 31अक्टूबर तक बढ़ाई जाती है फिर इसे 5 नवम्बर तक बढ़ा दिया गया। इसमें भी विभाग अपना खुराफ़ाती दिमाग़ लगाने से बाज़ नहीं आया। धरोहर धनराशि जो पहले दो प्रतिशत के लमसम थी। उसे बढ़ाकर अचानक से तक़रीबन पांच प्रतिशत के करीब पहुंचा दिया गया। यह सब किस कारण किया गया। इस रहस्य को सब पंजीकृत विभागीय ठेकेदार जानते हैं। परन्तु सच बोलने से हार्ट अटैक एवं ब्रेन हेमरेज की सम्भावना बढ़ जाती है। इसीलिए सभी महानुभाव सर सलामत रखने के लिए मौनी बाबा के परम शिष्य की भूमिका में नज़र आ रहे हैं।

बहरहाल यदिविभाग पर पैनी नजर रखने वाले लोगों की मानें तो यह सारा खेल कमीशनखोरी एवं पसंदीदा फर्मों को टेंडर देने के लिए ही खेला जा रहा है।आख़िर नियम कानून भी कुछ होता है। या फिर जब चाहा एक तुग़लकी फरमान से सब कुछ बदल दिया। विभाग की अंधेरगर्दी उस वक़्त अपने चर्मोत्कर्ष पर पहुंच गई जब निविदाओं के कुछ कार्यों को ही आधा अधूरा ही विभागीय साइट पर अपलोड कर दिया गया।यहाँ आपको बताते चलें कि बाकायदा शासनादेश जारी कर स्वीकृति की प्रत्याशा में टेंडर निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है पर लगता है सोनभद्र प्रदेश के बाहर है यहां योगी सरकार के शासनादेश लागू नहीं होते वरना करोड़ो के टेंडर स्वीकृति की प्रत्याशा में न निकाले जाते।विभाग के कुछ पंजीकृत ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि चार ऐसे कार्य साइट पर अपलोड है जिसके स्टीमेट रेट को दर्शाया ही नहीं गया। आखिर नंगा नहायेगा क्या निचोड़ेगा क्या। विष्मयकारी बात यह है कि स्टीमेट तैयार कर लिया बाबू मोशाय ने मगर स्टीमेट रेट नहीं तय कर पाये।

इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मदारों को नियमानुसार कठोर दंड देना चाहिए। इतनी बड़ी गलती विभाग आख़िर कैसे कर सकता है। इस हरक़त से स्पष्ट प्रतीत होता है कि विभाग को कमीशन और टेंडर मैनेज के अलावा कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है। सावन के अंधों को चारो तरफ हरा ही हरा दिखाई दे रहा है। सोनभद्र को चारागाह समझ रखा है इन भृष्टाचारियों ने। विभागीय साइट पर आधा अधूरा टेंडर क्यों अपलोड किया गया यह उच्चस्तरीय जांच में ही सामने आ सकता है।

यह बात भी गौर करने लायक है कि अगर 22 अक्टूबर निविदा की अंतिम तिथि की बात की जाये तो 12 बजे दोपहर तक के निर्धारित समय के बाद भी एक टेंडर क्रॉस कर तीन बजे तक खुला रहा। आपको बताते चलें कि एसी स्तर के टेंडर गुर्मा से हथवानी संपर्क मार्ग की साइट 12 बजे तक खुली रहनी थी। परन्तु किस कारण से इसे तीन बजे तक खुला रखा गया यह बात भी समझ से परे है।

एसी स्तर के जितने भी टेंडर जारी किए गए सभी में बिल ऑफ क्वांटिटी में रेट भरा गया। ताकि आसानी से समझकर ठेकेदार टेंडर रेट डाल सकें। तक़रीबन 35 करोड़ के चार टेंडरों में ही आखिर क्यों बिल ऑफ़ क्वांटिटी में रेट नहीं भरा गया। समय की शिला पर खड़ी जनता समझ रही है, सब गोलमाल है भाई सब गोलमाल। आखिर यह सब गोरख धंधा कैसे और किसकी शय पर संचालित हो रहा है। लोक निर्माण विभाग की अंधेरगर्दी और मनमर्ज़ी को देखकर ऐसा ही लगता है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि। जब सत्यनाश होना होता है तो सब की बुद्धि घास चरने चली जाती है। फिर वह नर हो या नारी, भिखारी हो या अधिकारी।

लोक निर्माण विभाग की पिछले कुछ दिनों की कार्यप्रणाली देख कर ऐसा लगता है कि विभाग में भ्र्ष्टाचार एक संक्रामक रोग की तरह तेजी से फैलता जा रहा है। विभाग में फैले भ्र्ष्टाचार को रोकने के लिए कठोर दन्ड व्यवस्था की जानी चाहिये। वरना यह बीमारी दीमक की तरह पूरे विभाग को खा जायेगी। भ्र्ष्टाचार हमारे नैतिक जीवन मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रहार है। भ्र्ष्टाचार में सर से पांव तक अखण्ड डूबा लोक निर्माण विभाग अपने स्वार्थ में अंधा होकर ईमानदार छवि वाले योगी आदित्यनाथ सरकार की ताबूत में अंतिम कील ठोकने के एकसूत्रीय कार्य को अंजाम देने में मशगुल नज़र आ रहा है। अंत में एक शेर बस बात ख़त्म, एक ही उल्लू काफी है बर्बाद गुलिस्तां करने को। हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा।

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