Wednesday, January 19, 2022
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लापरवाही: निजी लैब से डेंगू की पुष्टि , स्वास्थ्य विभाग कर रहा इंकार

सोनभद्र । इसे आंकड़ों की जादूगरी कहा जाए या फिर जिम्मेदारों द्वारा बरती जा रही उदासीनता । एक तरफ जहाँ स्वास्थ्य महकमा डेंगू के डंक को नियंत्रण में बता रहा है , वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल और निजी अस्पताल में लगातार पहुँच रहे डेंगू के संदिग्ध मरीज जिसमें बुखार के साथ – साथ मरीजों की अचानक से प्लेटलेट्स घट रही है । मरीज नाजुक हालत में उपचार के लिए अस्पतालों में दाखिल हो रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से गरीब आदिवासी इलाके के लोग अपनी जान गंवा रहे हैं ।

मलेरिया विभाग जहां अब तक मलेरिया बुखार अथवा ड़ेंगू से इनकार करता रहा है और जब संदिग्ध मलेरिया बुखार से लोगों के मरने की खबर अखबार की सुर्खियां बटोरने लगी तो नींद से जगा स्वास्थ्य विभाग ने जब जांच कराई तो मामले पर पर्दा डालने के प्रयास के रूप में आंकड़ो को दबाने का प्रयास जारी है मिली जानकारी के मुताबिक जिला मलेरिया विभाग द्वारा 19 नवम्बर को जारी किए गए आँकड़ें के अनुसार डेंगू के 87 संदिग्ध मरीजों की जांच कराने पर अभी तक मात्र 46 मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है , जबकि डेंगू पॉजिटिव मरीजों का वास्तविक आंकड़ा इससे कई गुणा होने की आशंका है , क्योंकि तमाम मरीज सरकारी अस्पताल नहीं पहुंच रहे बल्कि बहुतेरे मरीज निजी अस्पतालों में ही उपचार कराया है । ऐसे में जिन मरीजों की जांच प्राइवेट लैब से हुई है मलेरिया विभाग इन रिपोर्ट्स को नकारते हुए केवल सरकारी अस्पताल में कई गयी एलाइजा टेस्ट को ही विश्वसनीय होने का दावा कर रहा है ।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आँकड़ें के अनुसार जिले में अब तक 46 पुष्ट मरीज ही डेंगू के मिले हैं जिनका उपचार भी हो चुका है और अब जिले में डेंगू का एक भी मरीज नहीं है । पूरे मामले पर जिला मलेरिया अधिकारी डी ० के ० श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में अभी डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है । एंटीजन डेंगू की संभावित रिपोर्ट होती है और इससे कोई पुष्टि नहीं होती है । निजी पैथोलॉजी संचालकों को इसकी प्रतिदिन की रिपोर्ट मलेरिया विभाग को देनी होती है लेकिन मौजूदा समय में एक भी पैथोलॉजी संचालक इसकी रिपोर्ट नहीं दे रहे हैं । “

ऐसे में बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जब निजी पैथोलॉजी संचालक संभावित डेंगू के मरीजों की सूची मलेरिया विभाग को नहीं देते तो आखिर जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा अब तक अपने उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं सूचित किया गया साथ ही ऐसे लापरवाह निजी पैथोलॉजी संचालकों के खिलाफ़ अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई ? ऐसे में जिला मलेरिया अधिकारी की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में दिख रही है ।यहां एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड पैथोलॉजी सेंटरों से कई गुना पैथोलॉजी संचालित हो रही हैं तो इनमें से किन किन पैथोलॉजी की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को जाएगी ? सूत्रों की माने तो स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोग अपने कारखास के सहारे अवैध पैथोलॉजी संचालन करा रहे हैं।अब देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य विभाग आखिर कब अपनी कुम्भकर्णी निद्रा से जागता है ?

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