Sunday, October 2, 2022
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भ्रष्टाचार के झंडे गाड़ता लोक निर्माण विभाग सोनभद्र

लोकनिर्माण विभाग के एक बाबू ने अपने ही विभाग में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए एफिडेविट देकर किया शिकायत

बाबू ने एफिडेविट देकर कहा कि उनके विभागाध्यक्ष ने एक ही सड़क पर दो दो बार भुगतान किया

भ्रष्टाचार सहित कई अन्य आरोपों की जांच हेतु उच्चाधिकारियों को लिखा पत्र

सोनभद्र। सीएम योगी अपनी दूसरी पारी में न सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ रखी है बल्कि ताबड़तोड़ कार्यवाही भी कर रहे हैं ।
योगी सरकार में डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने भी अपने ही विभाग के खिलाफ पत्र लिखकर भ्रष्टाचार को उजागर किया है । अब जब स्वास्थ्य विभाग के अलावा बिजली विभाग व पीडब्लूडी में ट्रांसफर पोस्टिंग में गड़बड़ी को लेकर जांच चल रही है, ऐसे में सोनभद्र पीडब्ल्यूडी विभाग में तैनात एक कनिष्ठ सहायक ने अपने ही विभाग सीडी 2 में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । कनिष्ठ सहायक कुंवर शैलेन्द्र सिंह काफी समय से विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ उच्चाधिकारियों को अवगत कराते रहे हैं । लेकिन शैलेन्द्र सिंह को शायद यह नहीं पता था कि भ्रष्टाचार की जड़े इस कदर मजबूत हैं कि भ्रष्टाचारियों का तो कुछ नहीं होगा,अपितु अधिकारी व भ्रष्टाचारी गठजोड़ ने शैलेन्द्र सिंह का ही मानसिक शोषण प्रारंभ कर दिया ।

शैलेन्द्र सिंह के मुताबिक जब उन्होंने इसकी लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से की तो अधिकारियों ने शिकायत शपथ पत्र पर मांग लिया । जिसके बाद शैलेन्द्र सिंह ने भी ठान लिया कि वे भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाने के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं और उन्होंने अपनी शिकायत को शपथपत्र पर लिखकर दिया।

कुंवर शैलेन्द्र सिंह द्वारा दिये गए शपथ पत्र में 9 बिन्दुओ को दर्शाया गया हैं । लेकिन दफा 5 , 6, व 7 में उन्होंने अपने विभाग में फल फूल रहे विभागीय भ्रष्टाचार पर गंभीर आरोप लगाए हैं ।

शैलेन्द्र सिंह ने अपने दिए एफिडेविट के दफा 5 में आरोप लगाया कि कैसे 2.50 किलोमीटर वैनी सरईगढ़ से चमरान बस्ती संपर्क मार्ग का पैसा तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा द्वारा फर्जी ढंग से निकाल लिया गया ।

जबकि दफा 6 में भी फर्जी ढंग से धन गबन करने का जिक्र है । इसके अलावा दफा 7 में शैलेन्द्र सिंह का आरोप हैं कि ठेकेदार को मैनेज करने के लिए प्रहरी पोर्टल का इश्तेमाल न करके ई-टेंडरिंग पोर्टल पर निविदा आमंत्रित किया गया । जिससे तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा को लाखों का फायदा हुआ। शैलेन्द्र सिंह ने तो तत्कालीन अधिशासी अभियंता कन्हैया झा की कमाई आय से अधिक संपत्ति की जांच का मामला उठाते हुए जांच की मांग भी की है।
इस शपथ पत्र से साफ है कि कैसे अधिकारी बड़े पैमाने पर करोड़ों का भ्रष्टाचार किये हैं। शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि शपथ पत्र में दिए गए सभी बिंदुओं का उनके पास साक्ष्य भी मौजूद हैं । उन्होंने सीएम योगी समेत आलाधिकारियों से दोषी भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है ।

बहरहाल शैलेन्द्र सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग तो छेड़ दी है लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस जंग में उन्हें सरकार का कितना साथ मिल पाता है क्योंकि भ्रष्टाचार की जड़ें न सिर्फ गहरी हैं बल्कि लम्बी भी है, और इस चेन में कौन किसके साथ है यह कहना मुश्किल है जिसका जबाब फिलहाल आने वाला वक्त ही दे पाएगा।




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