Wednesday, November 30, 2022
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भाजपा के जन विश्वास यात्रा में भाग लेने सोनभद्र में मुख्यमंत्री का 22 को होगा आगमन

बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वयं भाजपा को लगता है कि उत्तर प्रदेश के जन को अभी उनके उपर  विश्वास नहीं है ? जो जन विश्वास यात्र निकाल कर उसमें विश्वास पैदा करना पड़ रहा है? उक्त जन विश्वास यात्रा के बहाने ऐसा क्या होने वाला है जिससे जन को विश्वास होगा ?इस तरह के कई अन्य सवालों के जबाब तो फिलहाल वक्त के गर्भ में है जो चुनाव के समय ही मिलेंगे।

सोनभद्र। विधानसभा चुनाव2022के लिये रणभेरी बज चुकी है।सभी दल अपने अपने योद्धाओं को मैदान में उतार दिया है और ये सभी दलों के योद्धा अपने तरकश में तीर कमान लेकर चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव जहाँ एक तरफ विजय रथ पर सवार होकर निकल पड़े हैं और उनके सभा स्थल पर उमड़ते जन सैलाब से सत्ताधारी दल भाजपा भी विचलित होकर दूसरी तरफ जन विश्वास यात्रा के बहाने अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए मैदान में उतर गई है।उसी कड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 22 दिसम्बर को सोनभद्र में आगमन हो रहा है।अब देखना होगा कि जो दल पिछले पांच साल से उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज है अब किस तरह से खुद पर जन को विश्वास दिलाता है? बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वयं भाजपा को लगता है कि उत्तर प्रदेश के जन को अभी उनके उपर विश्वास नहीं है ? जो जन विश्वास यात्र निकाल कर उसमें विश्वास पैदा करना पड़ रहा है? उक्त जन विश्वास यात्रा के बहाने ऐसा क्या होने वाला है जिससे जन को विश्वास होगा ?इस तरह के कई अन्य सवालों के जबाब तो फिलहाल वक्त के गर्भ में है जो चुनाव के समय ही मिलेंगे।

फिलहाल इन राजनीतिक यात्राओं से जनता में चुनाव के प्रति जागरूकता अवश्य आ रही है।चट्टी चौराहों पर अब केवल राजनीति ही राजनीति रह गयी है। एक बात अवश्य ही हुई है कि सभी दल के समर्थक अपने नेता व राजनीतिक दल के प्रति अपने अपने तर्कों से सामने वाले को चुप कराने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।अर्थात चुनावी दंगल प्रारम्भ है दलों के अपने अपने पहलवान अपने अपने समर्थकों के साथ मैदान में डट गए हैं और यही लोकतंत्र का असली स्वरूप भी है जब हर तरफ राजनीति व चुनाव की गूंज हो।जहाँ तक सोनभद्र में चुनावी गाड़ित की बात है तो यहाँ भी मुख्य मुकाबला भाजपा व समाजवादी पार्टी के बीच ही लग रहा है। यहाँकी कुल चार विधानसभा सीटों पर अलग अलग सीटों के अलग अलग समीकरण हैं।फिलहाल वर्तमान में सोनभद्र की चारों सीटों में तीन पर भाजपा व एक पर उसके सहयोगी अपनादल के विधायक चुने गए हैं इसलिए अब भाजपा को ही अपनी इज्ज़त बचानी है क्योंकि दूसरे दलों के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है।

सोनभद्र की बात की जाय तो पिछले पांच साल से जब से भाजपा की सरकार बनी है यहां का मुख्य व्यवसाय खनन लगभग बंद ही है और यहाँ एक बात यह भी स्मरण होनी चाहिए कि पांच वर्ष पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का मुख्य चुनावी मुद्दा खनन ही था और भाजपा का नारा “गिट्टी बालू सस्ता होगा हर गरीब का घर पक्का होगा ” पिछले विधानसभा चुनाव में खूब चर्चा में रहा। लगता है अब यही नारा भाजपा के गले की फांस बन गया है क्योंकि पिछले पांच साल से लगभग बन्द गिट्टी खनन और पूर्ण रूपेण बन्द बालू खनन से जहाँ एक तरफ गिट्टी बालू के दाम आसमान छूने लगे तो दूसरी तरफ बाजार में बढ़ते लाल बजरी के दाम की वजह से कुछ लोग अवैध खनन के सहारे खूब चांदी काटी जिसका जबाब देना सत्ता धारी दल के लिए चुनाव में भारी पड़ेगा। फिलहाल देखना दिलचस्प होगा कि 22 को मुख्यमंत्री का हो रहा आगमन 22 के चुनावी दंगल में भाजपा को कितना लाभ पहुंचाता है।

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