बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के पूण्य तिथि पर विशेष-
—पीड़ित दलित शोषित समाज के मनुष्यों के उत्थान के अग्रदूत थे डॉ भीमराव अंबेडकर
भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी सामाजिक समता के सबसे बड़े नायक थे जातिवाद छुआ छूत को दूर करने के संघर्ष के साथ-साथ एक महान शिक्षाविद विचारक बाबा साहब अंबेडकर महान राष्ट्रवादी और दलित शोषित पीड़ित लोगों के उत्थान के लिए समर्पित रहे बाबा साहब अपने जीवन काल में सामाजिक और राष्ट्र जीवन के अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण कार्य किए लेकिन कुछ लोगों ने उनके जीवन को एक विषय पहलू पर बांधने का प्रयास किया जो उनके साथ घोर अन्याय है और उनके बारे में अनुचित विश्लेषण है। बाबा साहब ने अभाव अपमान और बाधाओं का बंधन तोड़ कर अपने सामर्थ्य के बल पर अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की। उन्होंने 1935 में यह घोषणा की थी कि मैं हिंदू में जन्म तो अवश्य लिया हूं लेकिन हिंदू के रूप में मरुंगा नहीं। उन्होंने नागपुर में दीक्षा भूमि में बौद्ध धर्म स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इतिहास मुझे विध्वंसक के नाते पहचाने ऐसी मेरी ईच्छा नहीं है। बाबा साहब जिस प्रकार संविधान को बनाने वाले शिल्पकार हैं उसी प्रकार भारतीय परंपरा के महान धर्म पुरुष भी है। बाबा साहब हमेशा आत्मनिर्भरता की बात करते रहे उन्होंने स्वतंत्रता के पूर्व ही 1935 में ही आत्म निर्भर भारत और आधुनिक भारत की नीव रख दी थी। उनकी सोच के अनुसार ऐसा भारत जो आर्थिक रुप से संपन्न और तकनीकी रूप से उन्नत सभी को समान अवसर प्रदान करने वाला राष्ट्र हो।

बाबासाहेब का जीवन भारत माता के ऐसे सपूत के रूप में था कि जो यह कहा करते थे अगर सामान्य व्यक्ति को ऊपर उठाना है तो उसके लिए शिक्षा अत्यावश्यक है, उन्होंने सीखने की शिक्षा दी ।वह खुद भी एम ए, पी एचडी, एम एस सी, सीडीएससी, बैरीस्टर ऑफ लॉ, एल एल डी आदि की उपाधि अर्जित किया था। बाबा साहब ने अपने जीवन पर्यंत निचले तबके के लोगों को जगाया समाज में ऐसे दबे कुचले मनुष्यों को सोचने की एक नई दिशा दी ।उनके अंदर आत्मसम्मान की एक ज्योति जगाई और मूल्यों पर जीने की राह बताइ । वह पक्षपात पूर्ण समाजिक ढांचे के खिलाफ थे ।बाबा साहब ने कहा कि अस्पृश्यता को आपसे दूर भगाना होगा तभी हिंदू समाज बलशाली होगा और सब हम शक्तिशाली भारत का स्वप्न साकार कर सकते हैं । बाबा साहब ने यह बीज 1920 में ही बो दिया था । आज समाज के निचले तबके के लोग राष्ट्रपति, राज्यपाल, मंत्री ,कुलपति ऐसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन हो रहे हैं। देश के हर क्षेत्र में साहित्य, संगीत, कला, सिनेमा, नाट्य ,आर्थिक संस्था के साथ-साथ समाज के हर क्षेत्र में निचले तबके के लोग पहुंच रहे हैं।

इस राष्ट्र नायक की राष्ट्र सेवा का कोई मोल नहीं आक सकता । बाबा साहब का मानना था कि हिंदू समाज अनगिनत जातियों से बना है लेकिन हमारी संस्कृति एक है हम सब उसी से बंधे हैं ।समरस समाज जाति रहित समाज ही अधिक शक्तिशाली बनता है तभी हम कुछ अच्छे की उम्मीद कर सकते हैं । बाबा साहब ने सामान नागरिक संहिता पर बल दिया । उनका मानना था व्यक्ति के जीवन पर नियंत्रण का अधिकार धर्म का नहीं है। बाबा साहब ने एक राष्ट्र की संकल्पना की लोकतंत्र वादी होने के साथ ही उनकी अवधारणा ही की । स्वतंत्रता- समता और बंधुता ही लोकतंत्र का आधार है । राष्ट्र के निर्माण में बाबासाहेब आंबेडकर का योगदान अत्यंत अलौकिक है।
साभार डॉ धर्मवीर तिवारी (एडवोकेट)
