Tuesday, February 27, 2024
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पशु तस्करी के बढ़ते मामलों से बिहार बार्डर से सटे थानों की सक्रियता पर उठ रहे सवाल

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पिछले महीने में शाहगंज पुलिस द्वारा पकड़ी गई पशुओं से भरी पिकप , कर्मा पुलिस द्वारा पशु तस्करों के पीछा कर पकड़ने ,29 जून को म्योरपुर के लीलासी गांव के पास पुलिस द्वारा पीछा करने पर गोवंस लेकर जा रही पिकप को छोड़ कर गो तस्करों के फरार होने तथा 24 जून को मांची थाना क्षेत्र के सुअरसोत से लगभग 15 पशुओं से लदी पिकप को पुलिस द्वारा पकड़ने सहित गो तस्करी से जुड़े कई ऐसे मामले हैं जो इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि सोनभद्र पशु तस्करों के लिए फिलहाल सबसे मुफीद रास्ता बनता जा रहा है।उक्त घटनाओं से एक बात तो साफ है कि गो तस्करी के मामले में दाल में काला नहीं,पूरी दाल ही काली है तथा पशु तस्करी का धंधा इन दिनों धड़ल्ले से चल रहा है न कोई रोक न कोई टोक।

पहले भी पशु तस्करी के पीछे पुलिस व गो तस्करों के बीच लुकाछिपी का खेल चलता था लेकिन अब तो लगता है यह धंधा खुलेआम हो रहा है। अभी कुछ महीने पूर्व पन्नूगंज पुलिस ने धड़ाधड़ आधा दर्जन से अधिक गाड़ियों को पकड़ कर इस धंधे से जुड़े लोगों में खलबली मचा दी थी ,पुलिस की सक्रियता ने गो तस्करी पर काफी हदतक रोक भी लगी थी। लेकिन लगता है कि तस्कर अब पन्नूगंज का रास्ता छोड़कर किसी अन्य रास्ते से रायपुर में प्रवेश कर रहे हैं। चूंकि रायपुर थाना क्षेत्र गो तस्करी के लिए लगता है पूरी तरह से सुरक्षित है। यहां कोई रोक टोक करने वाला नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक एक सप्ताह से इस रास्ते गो तस्करी वाली गाड़ियां बिहार जा रही हैं। पहले तो केवल पीकप से ही तस्करी की जाती थी परन्तु सूत्रों के मुताबिक अब डीसीएम तथा ट्रक में भी पशु जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक जहां से पशु गाड़ियों में भरे जाते हैं वहीं से सीधे रायपुर थाना क्षेत्र की गतिविधियों की लोकेशन ले ली जाती है और थाने की सारी गतिविधियां गो तस्करों तक पहुचाने वाला भी निश्चित हीपुलिस कानजदीकी ही होगा। यहाँ यह बात भी गौरतलब है कि बरसात होने के कारण बिहार जाने के सारे चोर रास्ते बाढ़ की वजह से बन्द हैं ऐसे में यह तो निश्चित है कि गो तस्करी वाली सारी गाड़ियां मुख्य मार्ग से ही गाड़ियां बिहार जा सकती हैं जबकि बार्डर पर भी पुलिस चौकी है वहां पीएसी भी तैनात है सीसी कैमरा भी लगा हुआ था परन्तु पता चला है कि बार्डर की चौकी का कैमरा हटाया जा चुका है।

पुलिस चौकी से किन परिस्थितियों में कैमरा हटाया गया यह समझ से परे है। पशुओं से भरी गाड़ियां किसके इशारे पर बेधड़क तूफान की तरह फर्राटा भरते हुए बिहार में प्रवेश कर जाती हैं यह सवाल भी लोगों के जहन में कौंध रहा है। बिहार जाने वाले उक्त रास्ते पर पड़ने वाली चौकी थाने पर उक्त गाड़ियों को पुलिस क्यों नहीं रोकती ? इसके पीछे क्या कारण है ? लोग कयास लगा रहे हैं कि यहाँ दाल में कुछ काला है लेकिन लगता है कि यहां तो पूरी दाल ही काली है।

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