Wednesday, November 30, 2022
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नए साल 2023 से एम एम 11 की जगह फार्म सी से होगा खनिज सामग्री का परिवहन

1 जनवरी 2023 के पूर्व क्रेशर व्यवसायियों को लेना होगा पत्थर स्टोरेज अर्थात भंडारण लाइसेंस

नए वर्ष की शुरुआत से खनिजो के परिवहन के लिए एम एम 11 प्रपत्र की जगह फार्म सी से होगा प्रयोग।एम एम 11 क्रेशर व्यवसायी भंडारण के पश्चात अपने पास रखेंगे

सोनभद्र। पिछले दिनों विशेष सचिव खनिज अरविंद कुमार जैन एवं अपर निदेशक खनिज एस के सिंह ने सोनभद्र का आकस्मिक दौरा कर खनन बेल्ट की हकीकत को परखा तथा पत्थर खनन बेल्ट में अनियमितता पर नाराज़गी भी ज़ाहिर की। साथ ही अगोरी ख़ास एरिया में बालू साइडों के विषय में डीएफओ से वार्तालाप के बाद घड़ियाल और मगर के लिए संरक्षित एरिया की रिपोर्ट शासन को प्रेषित करने की बात कही। बताते चलें कि रोबेर्टसगंज मुख्यालय के चुर्क मोड़ पर स्थित सर्किट हाउस में विंध्य न्यूज़ नेटवर्क से वार्ता के दौरान जब यह बात जांच टीम के संज्ञान में लाई गई कि 2005 में कमला पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश सरकार केस में हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्योंL को मद्देनज़र रखते हुये कमला पांडेय की लीज़ को ख़ारिज कर दिया था। अपने जजमेंट में हाइकोर्ट ने इसे मगर और घड़ियाल के लिए संरक्षित एरिया माना था।

वहीं व्यापारियों के साथ सर्किट हाउस में मीटिंग के दौरान उनकी समस्याओं के निस्तारण पर भी बल दिया गया। खनन व्यवसाईयों की तरफ़ से अयोध्या दूबे ने गंतब्य तक पहुंचने में लगने वाले रियल समय व परमिट पर अंकित समय में थोड़ा भी अंतर होने एवं परमिट पर अंकित मात्रा से थोड़ा भी अधिक होने पर पेनाल्टी लगाने से राहत देते हुए पेनाल्टी न लगाने की विशेष सचिव से गुज़रिश की। इस पर बैठक कर उचित रास्ता निकालने की विशेष सचिव एके जैन ने आश्वासनवहीं विशेष सचिव खनिज ए के जैन ने व्यवसाईयों को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक जनवरी 2023 से क्रेशर प्लांट को भंडारण लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। सख्ती से इसका पालन कराया जायेगा। जो भी क्रेसर व्यवसाई इस नियम का पालन नहीं करेगा उसपर नियम के तहत कारवाई की जायेगी। उसके बाद गिट्टी का परिवहन फार्म सी से होगा। विशेष सचिव ने बताया कि प्रदेश के अन्य जनपदों में गिट्टी का परिवहन फार्म 15 सी से ही होता है। पूरे प्रदेश में शासन द्वारा नीति की एकरूपता के लिए आदेश जारी हो चुका है।

विशेष सचिव ने बताया कि जनपद सोनभद्र में रेवेन्यू जनरेट करने एवं खनन इंडस्ट्री में वृद्धि करने पर भी फोकस किया जा रहा है। 14 ऐसे पट्टे हैं जिनकी ई सी काफी दिनों से विलंबित है। यदि आवेदकों को इनके ईसी हासिल करने में कोई दिक्कत है तो निदेशालय को अवगत करायें ताकि समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा सके। यदि ये लोग इंटरेस्टेड नहीं हैं तो इनकी एलवाई निरस्त करने की कार्रवाई अमल में लाई जायेगी।

वहीं निदेशालय से आई जांच टीम को व्यवसाईयों ने अवगत कराया कि सिंदुरिया एवं मितापुर में धारा 20 के प्रकाशन की फाइल शासन में काफी समय से पेंडिंग पड़ी धूल फांक रही है। यदि धारा 20 का प्रकाशन कर दिया जाये तो खनन एरिया की वृद्धि हो सकती है। कुछ खनन व्यवसाईयों ने प्रश्न उठाया कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में यदि अनुमानित सीमा से कम बालू का परमिट निकला है तो वह अगले साल नहीं जुड़ता। साथ ही बचा हुआ धन भी अगले साल नहीं जुड़ता। खनन व्यापारियों की इस समस्या पर विशेष सचिव ने बताया कि ईसी पर खनन छमता वार्षिक आधार पर दिया जाता है।यदि पिछले साल की बची हुई मात्रा को वर्तमान साल में जोड़ दिया जाएगा तो ईसी का वायलेशन हो जायेगा। क्योंकि ईसी में खनन की मात्रा वार्षिक आधार पर दी जाती है। यदि पिछले कि बची हुई मात्रा नये वर्ष में जोड़ी जायेगी तो इकोलॉजिकल सिस्टम पर विपरीत असर पड़ेगा।

अंत में खनन व्यवसाईयों ने निदेशालय की जांच टीम से मांग की कि बिहार से ओवरलोड एवं बिना परमिट के बालू का परिवहन धड़ल्ले से हो रहा है। जिसके चलते उत्तर प्रदेश की मंडी में हमारा माल जल्दी नहीं बिक पाता। इस पर लगाम लगाने से जनपद का खनन सेक्टर अधिक रेवेन्यू उपलब्ध कराएगा। इस पर विशेष सचिव खनिज एके जैन एवं जॉइंट डायरेक्टर खनिज एसके सिंह ने कारगर कदम उठाने का आश्वासन दिया है।




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