Friday, June 21, 2024
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जिलापंचायत द्वारा कराए जाने वाले कार्यों की निकाली गई निविदाओं को मैनेज करने के खेल की मुख्यमंत्री से शिकायत कर उठायी जांच की मांग

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सोनभद्र। अधिवक्ता राजीव चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख जिलापंचायत सोनभद्र द्वारा कराए जाने वाले कार्यो की निकाली गई निविदाओं को कुछ अपने चहेतों ठेकेदारों के पक्ष में देने के लिए जिलापंचायत के जिम्मेदार लोगों द्वारा टेंडर मैनेज करने के लिए अपने चहेतों ठेकेदारों से दुरभिसंधि कर उनके विरुद्ध जो भी ठेकेदार निविदा डाल दिए हैं उन्हें नियमविरुद्ध तरीके से वाहर का रास्ता दिखाये जाने का आरोप लगाया है।उन्होंने जिलाधिकारी व मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कई बिंदुओं पर जांच कर कार्यवाही करने का अनुरोध भी किया है।जिलाधिकारी को लिखे पत्र में उक्त अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि जिलापंचायत सोनभद्र द्वारा कराए जाने वाले कार्यो के लिए निकाली गई निविदाओं में अपर मुख्य अधिकारी व अभियन्ता द्वारा लगातार निविदा प्रक्रिया में विहित नियम के विरूद्ध जा कर अपने चहेते ठेकेदारों के पक्ष में टेन्डर मैनेज करने हेतु दोष पूर्ण निविदा प्रकाशित कर जिला पंचायत में विभागीय दर से 1 % से भी कम दर पर लगभग 20 करोड़ रुपये से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों के टेन्डर को मैनेज कर राज्य सरकार की मंशा के विपरीत टेन्डर में प्रतिस्पर्धा न करा कर टेंडर मैनेज का खेल किया जा रहा है ।

उन्होंने आरोप लगाते हुए आगे लिखा है कि इनके द्वारा किये गये कुछ कुकृत निम्नवत है – प्र स 989 / जि ० प ० / ई – निविदा सूचना / 22-23 दिनांक- 07/01/2023 को एक निविदा आमंत्रित की गई जिसमे पंजीकृत ठेकेदारों द्वारा प्रतिशत दर में मांगी गई निविदा में निविदा शर्तो के कालम सं ० 10 पर निविदा प्रपत्रों के मूल अभिलेख फाईनेन्शीयल बीड खोले जाने के उपरान्त कार्यालय में प्रस्तुत कराने हेतु लिखा गया है।वही उसी टेंडर के शर्तनामा 17 पर प्रपत्रों के मूल अभिलेख ( Hard copy ) दिनांक -04 / 02 / 2023 को 2 बजे तक बिना टेंडर के टेक्नीकल और फाइनेन्शीयल बीड खोले ही मांगी गई है, जो कि ई – टेन्डर वेबसाईड पर दिए गए टेंडर शर्तो के नियम विरुद्ध है तथा टेंडर की उक्त दोनों शर्तें ही आपस मे विरोधाभासी हैं। यही नही प्र ० स ० 989 / जि ० प ० / ई – निविदा सूचना / 22-23 दिनांक- 07/01/2023 द्वारा ही जिन पाँच कार्यों का लगभग 10 करोड़ का टेन्डर मांगा गया और जिसे दिनांक- 04/02/2023 को ही खुलना था परन्तु आज तक टेन्डर प्रक्रिया अपर मुख्य अधिकारी द्वारा पूर्ण नहीं किया गया क्योंकि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उक्त टेंडर प्रक्रिया में इन लोगों की मैनेज वाली बात न मानते हुए कुछ ठेकेदारों ने टेंडर डाल दिया है ।

इतना ही नहीं प्र०स० 989 / जि ० प ० / ई – निविदा सूचना / 22-23 दिनांक- 07/01/2023 द्वारा निकले गए टेंडर प्रक्रिया में जिन भी कार्यों पर इनके द्वारा मैनेज किये गये ठेकेदारों से इतर जाकर जिन भी ठेकेदारों ने टेंडर डाल दिया अर्थात यदि किसी कार्य पर तीन से अधिक निविदा पड़ गयी हैं तो उन नियमानुसार डाले गये टेन्डर को मैनेज करने के लिए उक्त दुरभिसंधि में शहभागी कुछ अधिकारी व ठेकेदार नियम विरूद्ध जा कर उन कार्यों पर निविदा डालने वाले ठेकेदारों से अपना टेन्डर न खोले जाने का प्रार्थना पत्र लेकर टेन्डर मैनेज करने का खेल खेल रहे है जो नियम विरूद्ध है । यहां आपको यह भी बताते चलें कि नियमानुसार ई – टेन्डर वेबसाईड पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित नियमावली के मुताबिक एक बार टेंडर डाल देने के पश्चात निविदा को ठेकेदार द्वारा किसी भी दशा में वापस नहीं किया जा सकता, ऐशा करने पर ठेकेदारों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही किये जाने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने आगे आरोप लगाते हुए लिखा है कि जिन ठेकेदारों द्वारा उन लोगों की मंशानुरूप टेन्डर वापस लेने का प्रार्थना पत्र नहीं दिया जा रहा है उस ठेकेदारा के विरूद्ध अपर मुख्यधिकारी व अभियन्ता द्वारा टेन्डर निरस्त करते हुए कठोर कार्यवाही किये जाने की धमकी भी दी जा रही है ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इससे पूर्व के अपर मुख्यधिकारी द्वारा खनिज परिवहन शुल्क वसूली हेतु निविदा अप्रैल मई मे आमंत्रित की गई थी जिसमे शर्त रखी गई थी कि ठेके कि सम्पूर्ण धनराशि सितम्बर माह तक जमा करा ली जाएगी परन्तु जिस फर्म ने जिला पंचायत से खनिजों के परिवहन पर वसूली का ठेका लिया है उससे दुरभिसंधि करके आज तक ठेके की निर्धारित राशि ठेकेदार द्वारा जिला पंचायत मे जमा नहीं किये जाने के बाद भी उक्त ठेकेदार को ही वसूली की छूट देकर जिला पंचायत को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।यहां यह बात भी विचारणीय है कि खनिजों के परिवहन की वसूली हेतु अधिकृत ठेकेदार को ठेके की शर्तों में निहित प्रावधानों के विपरीत आखिर छूट क्यूँ दी जा रही है जो स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमित्ता की श्रेणी में आता है ।

उपरोक्त कुछ उदाहरणों व प्रकरणों से स्पष्ट होता है कि अपर मुख्याधिकारी व अभियन्ता द्वारा जिला पंचायत सोनभद्र में वित्तीय अनिमित्तता का खुला खेल खेला जा रहा है और ऐसा करने से राजस्व कि लगातार क्षति की जा रही है।उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अनुरोध किया है कि उक्त वित्तिय अनियमितता में भागीदार अधिकारियों जो कि टेन्डर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा रोक राजस्व की क्षति करने में लगे हैं उनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाय।उन्होंने आगे लिखा है कि जिलापंचायत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में कराए गए टेंडर प्रक्रिया की जांच कराई जाय और टेंडर प्रक्रिया में हेर फेर कर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने में लिप्त जिलापंचायत के अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही अमल में लायी जाय।देखना दिलचस्प होगा कि अधिवक्ता की उक्त चिट्ठी पर सरकार के जिम्मेदार लोगों द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है ,वैसे समय की शिला पर खड़ी जनता सब देख रही है।फिलहाल आगे क्या होगा यह तो आने वाला समय ही बता पायेगा पर यह तो निश्चित ही है कि इस पत्र से कइयों के माथे पर बल पड़ सकता है।

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