Friday, July 12, 2024
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क्या वास्तव में सोनभद्र का खनन उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है ? यह बंदी का ढोंग कहीं खनन माफियाओं की सोची समझी साजिश तो नहीं ? या फिर खनन विभाग के आंकड़ों के बाज़ीगरी में दम तोड़ रहा खनन उद्योग

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Sonbhadra news (सोनभद्र)।जुलाई के प्रथम सप्ताह में खनन निदेशक रोशन जैकब के अचानक सोनभद्र दौरे के बाद खनन उद्योग में मची अफरा तफरी का परिणाम है कि सोनभद्र की सड़कों का दिन रात सीना रौदती खनन सामग्री लेकर बड़ी बड़ी ट्रकों के पहिये थम से गये हैं।सड़क पर अचानक पसरे इस सन्नाटे की वजह से खनन उद्योग के सहारे रोजी रोटी का जुगाड़ करने वाले तबके के माथे पर पसीना छलकने लगा और इस तबके के सहारे अपनी राजनीति करने वाले लोग अब यह कहना शुरू कर दिए हैं कि खनन क्षेत्र के अचानक बन्द होने से क्षेत्र में काम कर अपनी रोजमर्रा की के जरूरतों की पूर्ति करने वाले तबके के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

खैर यह तो है तस्वीर का एक पहलू है जिसके सहारे कुछ लोग अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं। यहां गौर करने वाली बात यह है कि तस्वीर का दूसरा पहलू इस तस्वीर के एकदम उलट तस्वीर पेश कर रही है और यह तस्वीर यह कह रही है कि यह खनन उद्योग के बंदी वाली तस्वीर झूठी है जिसे कुछ लोग खनन विभाग को खलनायक साबित करने के लिए दिखा रहे हैं और अपने तर्क के समर्थन में खनन विभाग जो आंकड़े पेश कर रहा है वह चौकाते जरूर हैं।खनन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो देखेंगे कि 01 जुलाई से 31 जुलाई 2021 तक पूरे एक महीने में सोनभद्र से गिट्टी लेकर परिवहन करने वाली ट्रकों की संख्या 5019 रही है जबकि उक्त समयावधि के दौरान खनन अपनी निर्बाध गति से चल रहा था और खनन विभाग के इस संकट काल मे जिसमें कहा जा रहा कि खनन उद्योग लगभग बंदी के दौर से गुजर रहा है में 01 जुलाई से 23 जुलाई 2023 तक के आंकड़े के मुताबिक कुल 8685 ट्रकों ने गिट्टी लेकर परिवहन किया है। ऐसे में आंकड़े तो यही कह रहे हैं कि जब जुलाई 2021 के पूरे एक माह जब खनन निर्बाध गति से चल रहा था ,से डेढ़ गुना अधिक ट्रकों ने केवल इस जुलाई के मात्र तीन सप्ताह में ही एम एम 11 लेकर गिट्टी का परिवहन किया है तो खनन उद्योग की बंदी वाली बात कहां तक सही है ? और खनन विभाग की यह बात भी सही है क्योंकि आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते।अब यह पता करने की जरूरत अवश्य ही दिख रही है कि कहीं आंकड़ों की इस बाजीगरी में वास्तविकता को छुपाने का खेल तो नहीं चल रहा ? या फिर बात कुछ और ही है।

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अब यदि खनन विभाग के इस आंकड़े पर विश्वास करते हैं तो यह कहा जा सकता है कि वर्तमान में खनन पहले से बेहतर चल रहा है,परन्तु वास्तविकता में ऐसा दिख नहीं रहा क्योंकि सड़को पर पसरा हुआ सन्नाटा खनन विभाग के आंकड़ो पर विश्वास नहीं करने देता। सोनभद्र की लाइफ लाइन कही जाने वाला वाराणसी शक्तिनगर मार्ग पर खनन सामग्री लेकर दिन रात फर्राटे लेती ट्रकों की आवाजाही एकदम शांत है इसके बाद भी खनन विभाग का आंकड़ा चौकता जरूर है।उक्त आंकड़ों के विश्लेषण व खनन पर पैनी नजर रखने वाले विशेषज्ञों की बातों से एक बात निकल कर जरूर सामने आती है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि इसके पहले के वर्षों में एम एम इलेवन अर्थात परमिट के सहारे चलने वाली गाडियों से अधिक मात्रा बिना परमिट के खनन सामग्री लेकर चलने वाले वाहनों की रही हो और अब खनन विभाग अपना दामन पाक साफ दिखाने के लिए केवल परमिट से चलने वाले वाहनों का आंकड़ा प्रस्तुत कर अपनी पीठ थपथपा रहा है पर इससे एक बात तो साफ हो जाती है कि पहले सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था।वर्तमान में सोनभद्र की सड़को पर पसरा सन्नाटा खनन विभाग की अंदर की कहानी बयां करने के लिए काफी है।

इन आंकड़ो के विश्लेषण से एक बात तो साफ तौर पर कही जा सकती है कि इसके पूर्व परमिट लेकर खनन सामग्री परिवहन करने वाले वाहनों से अधिक बिना परमिट के ही खनन सामग्री लेकर परिवहन करने वाले वाहनों के कारण ही सड़को पर वाहनों का रेला दिखाई देता था और जैसे ही इस पर विराम लगा वैसे ही खनन पट्टाधारकों व क्रेशर संचालकों के पेट मे मरोड़ होने लगी क्योंकि इसकी वजह से इनके अवैध खनन के खेल पर विराम लग गया।आखिर जब परमिट से चलने वाले वाहनों की संख्या में कोई कमी नहीं हुई है तो फिर खनन क्षेत्र में इतनी हाय तौबा क्यूँ मची हुई है ?आखिर खनन से जुड़े लोगों के पेट मे इतनी ऐंठन क्यों है ?

खनन पर पैनी नज़र रखने वाले लोगों की मानें तो खनन क्षेत्र मे किये गए अवैध खनन से निकले माल को बाजार तक पहुंचने के लिए ही बिना परमिट के परिवहन की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि वैध खनन के लिए तो विभाग परमिट देता ही है।यहां यह बात स्वतः ही स्पष्ट हो जाती है कि जब खनन निदेशक के आदेश से क्रेशर पर भंडारित गिट्टी व बोल्डर की जांच की गई और क्रेशर पर स्टोर कर रखे गए गिट्टी व बोल्डर के सापेक्ष परमिट की जांच की गई तो अधिकतर के पास भंडारित मात्रा बिना कागजात के मिली जिसे विभाग ने अवैध मानते हुए नीलाम कराने की प्रक्रिया में जुट गया है।इससे एक बात तो साफ है कि जिले में अवैध खनन जोरों पर चल रहा था। उक्त अवैध खनन पर लगाम लगने से अवैध खनन कर मालामाल हो रहे खनन व्यवसायियों के पेट मे मरोड़ होना स्वाभाविक ही है।

यह तस्वीर पहले की स्थिति को बयां कर रही है जब खनन निर्बाध गति से चलता है

खनन निदेशक के सोनभद्र दौरे के बाद खनन क्षेत्र में स्थापित क्रेशरों पर भंडारित गिट्टी बोल्डर की जांच ने खनन विभाग की पोल ही खोल दी क्योंकि क्रेशरों पर बिना वैध कागजात के स्टोर कर रखी गयी खनन सामग्री यह साबित करती है कि खनन पट्टाधारकों ने नियमों को ताक पर रख अवैध खनन किया।क्योंकि क्रेशरों पर मिली गिट्टी व बोल्डर किसी न किसी वैध पट्टेधारक के खदान से निकला अवैध माल है।ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वास्तव में खनन विभाग को यह नहीं पता था कि उसके पट्टाधारक अवैध खनन कर मालामाल हो रहे हैं ? या फिर खनन विभाग इस सच्चाई की तरफ से आंख मूंद रखा था और खनन क्षेत्र में जो हो रहा था उसमें उसकी मौन सहमति थी और अपना दामन बचाने के लिए खनन विभाग केवल सड़क पर बिना परमिट खनन सामग्री के परिवहन करने वाली ट्रकों से समन शुल्क वसूल कर अपनी पीठ थपथपा रहा था और इसकी आड़ में अनवरत अवैध खनन की तरफ से आंख बंद करके ऑल इज वेल साबित करने की कोशिश में लगा रहा।

सोनभद्र की सड़कों पर पसरा सन्नाटा

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