Friday, June 21, 2024
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क्या खनन विभाग की गलत नीतियों के कारण बर्बादी के कगार पे खड़ा है सोनभद्र का खनन उद्योग

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–वर्ष 2012 में खदान धसने से दर्जनों मजदूरों की मौत के बाद जैसे हालात से गुजर रहा सोनभद्र का खनन उद्योग

–पिछले कुछ हफ़्तों से परमिट की कमी के कारण कीमतों में अचानक हुई बढोत्तरी से पूर्वांचल की मंडियो में सोनभद्र गिट्टी बालू के दाम आसमान छू रहे

परमिट के इंतजार में खनन सामग्री लोड कर हफ़्तों तक खड़ी रह जा रही ट्रकों से वाहन स्वामी हैं परेशान

खनन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि खनन उद्योग की किसी को नहीं है चिंता, जिम्मेदार चाहे वह यहां के जनप्रतिनिधि हों या फिर अधिकारी सब खनन उद्योग को चारागाह समझ उसके दोहन में लगे हैं

Sonbhdra news (सोनभद्र)। पिछले कुछ हफ़्तों से सोनभद्र के खनन उद्योग में गतिविधियां ठप्प सी पड़ गयी हैं।ट्रकों के पहिये थम से गए हैं जिसका परिणाम है कि खनन उद्योग से जुड़े लोगों की रोजी रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।अब कारण जो भी हो पर यदि यही हाल रहा तो खनन कारोबार से जुड़ी गतिविधियों से रोजी रोटी का जुगाड़ करने वाले मजदूर तबके के चूल्हे ठंडे पड़ सकते हैं और शायद इस बात की चिंता किसी को नही है क्योंकि यह ऐसा तबका है जो रोज कुंआ खोदता है और पानी पीता है ऐसे में यदि खनन उद्योग कुछ दिनों के लिए भी बन्द होता है तो यह मजदूर तबका सबसे अधिक प्रभावित होता है।

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यहां आप सब को यह भी बताते चलें कि जब से प्रशासन ने बिना परमिट खनन सामग्री लेकर परिवहन करने वाले वाहनों की जांच के लिए हाई सिक्योरिटी कैमरे सहित स्थाई जांच चौकी स्थापित कर सघनता से जांच पड़ताल शुरू किया तभी से इस तरह की समस्या से खनन उद्योग को जूझना पड़ रहा है क्योंकि जांच की आंच से बिना परिमट खनन सामग्री लेकर परिवहन मुश्किल होता गया जिसका परिणाम यह हुआ कि अचानक परमिट की खपत बढ़ गयी, परिणामस्वरूप पट्टाधारकों के पास परमिट का स्टॉक कम होने लगा और परमिट की कीमतों में अचानक उछाल आ गया और उसका परिणाम यह हुआ कि परमिट की कीमत बढ़ने से बाजार में गिट्टी बालू के दाम आसमान छूने लगे।उधर दूसरी तरफ पट्टाधारकों के पास परमिट का स्टॉक कम होने से खनन सामग्री लोड करने के बाद ट्रकों को हफ़्तों इंतजार करना पड़ रहा है जिसका दुष्परिणाम यह हो रहा कि जब क्रेशर से माल बाहर बाजार में नहीं निकल रहा तो पत्थरों की खदानों से निकले बोल्डर की खपत कम हो जाने के कारण खदानों में काम करने वाले मजदूरों के रोजगार पर इसका सीधा असर हो रहा है।

खनन उद्योग पर मंदी के असर से हजारों परिवारों पर रोजी रोटी का संकट

खनन उद्योग पर पैनी नजर रखने वाले व्यवसायियों की मानें तो खनन गतिविधियों में कमी से इस उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों के चूल्हे ठंडे पड़ सकते हैं।उन लोगों की मानें तो खनन उद्योग से जुड़े क्रेशरों की बंदी से यदि एक क्रेशर पर दो लोडर भी कार्य कर रहे हों तो कम से कम पांच मजदूर होते हैं।डाला ओबरा में लगभग 300 क्रेशर हैं ऐसे में यदि यह उद्योग मंदी में गया तो सीधे सीधे 1500 परिवारों पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।इतना ही नहीं यदि खनन उद्योग पर मंदी आयी तो इस उद्योग से जुड़े अन्य व्यवसाय मसलन खदानों से पत्थर लोड कर क्रेशरों तक पहुचाने के कार्य मे लगे हजारों टीपर पर कार्यरत ड्राइवर व खलासी को मिला दिया जाय तो 3000 से 4000 परिवार प्रभावित होंगे।इतना ही नही खनन क्षेत्र से पूरे पूर्वांचल की मंडी तक खनन सामग्री लेकर परिवहन करने वाले वाहनों पर कार्यरत मजदूरों को मिला दिया जाय तो लगभग हजारों परिवार इससे भी प्रभावित होंगे। यही वजह है कि खनन उद्योग में आयी इस समय की अप्रत्याशित मंदी से लोग चिंतित हैं।

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क्या कहते हैं अधिकारी

खनन गतिविधियों में आई इस कमी से खनन उद्योग पर मंडराते संकट पर बातचीत करने के दौरान जिला खान अधिकारी ने कहा कि खनन उद्योग पर कोई संकट नहीं है और न ही खनन गतिविधियों में कोई कमी आयी है।उन्होंने पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों से अपनी इस बात की पुष्टि भी की कि खनन गतिविधियों में कोई कमी नहीं आयी है।उन्होंने कहा कि जून माह के आंकड़ों पर गौर करें तो औसतन 450 से 550 ट्रकों ने गिट्टी लेकर परिवहन किया है और जुलाई के प्रथम सप्ताह के आंकड़ों को देखें तो 01 जुलाई को 482,02 जुलाई को 420,03 जुलाई को 344,04 जुलाई को 429,05 जुलाई को 429,06 जुलाई को 417 और 07 जुलाई को 388 ट्रकों ने गिट्टी लेकर परिवहन किया है।

ऐसे में यह तो निश्चित है कि खनन गतिविधियों में कोई कमी नहीं आयी है।हां उन्होंने कहा कि कुछ बेशिक समस्याएं हैं जिसे दूर करना होगा।जैसे कि सोनभद्र की लाल बजरी और डोलो स्टोन की पूर्वांचल की मंडी में मांग अधिक है और सोनभद्र में खदानों की एरिया व संख्या दोनों मिलकर मांग के अनुरूप प्रोडक्शन नहीं कर पा रही हैं यही वजह है कि जब मांग से आपूर्ति की मात्रा कम होगी तो बाजार के बेशिक नियम के मुताबिक बिचौलियों को मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा कुछ इसी तरह की समस्याओं से गुजर रहा है सोनभद्र का खनन उद्योग। बाजार में मांग और आपूर्ति की कमी के इसी अंतर को पूरा करने के लिए कुछ लोग अनलीगल तरीके से खनन सामग्री को बाजार तक पहुँचाने के लिए अनलीगल रास्ते अपनाते रहे हैं और जब उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है तो उन्हीं लोगों द्वारा बेवजह विभाग को बदनाम किया जा रहा है।फिलहाल विभाग जल्द ही इस कमी को पूरा करने के लिए पत्थर व बालू की नई खदानों के आवंटन के लिए निविदाएं आमंत्रित करने की तैयारी में लगा है और जल्द ही बाजार में अधिक मात्रा में गिट्टी बालू के पहुंचने के बाद कीमतों में कमी आ जायेगी।

फिलहाल यदि जल्द ही कोई ठोस उपाय नहीं किया गया तो खनन उद्योग की मंदी से प्रभावित होने वाले मजदूरों को बेरोजगारी की समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।खनन व्यवसायियों का कहना है कि कोई भी इस व्यवसाय की बेसिक समस्या को न ही समझ रहा और न ही उसके समाधान के प्रति गम्भीर है, चाहे वह यहां के जनप्रतिनिधि हों,या फिर खनन उद्योग को रेगुलेट करने वाले अधिकारी,सब इस उद्योग को चारागाह समझ अपने अपने हित को साध रहे।यदि यही हाल रहा तो इस उद्योग से जुड़े व्यापारी किसी दूसरे प्रदेश को पलायन कर सकते हैं जहाँ व्यापार करना आसान हो।और यदि एक बार पूंजी का पलायन शुरू हो गया तो सोनभद्र के खनन बेल्ट को वीरान होते देर नहीं लगेगी,और इसके बाद जो इस क्षेत्र में बेरोजगारी आएगी उसकी तस्वीर बहुत ही भयावह हो सकती है।बातचीत के दौरान कुछ खनन व्यवसायियों ने कहा कि वर्ष 2012 में एक खनन हादसे के बाद सोनभद्र के खनन उद्योग के बंदी के दौरान बेरोजगारी की जो तस्वीरे आई थी शायद उसे कोई भूला नहीं होगा,इसलिए जल्द ही इसपर यदि कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तो इसके परिणाम भयावह होंगे।

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