Wednesday, February 28, 2024
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क्या कुमार मंगलम बिड़ला भी टैक्स की चोरी करते हैं ? मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मांगी थाने से रिपोर्ट !

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ज्ञातव्य है कि विंध्यलीडर ने अपने वेव साइट्स पर 28 और 29 जनवरी 2022 को प्रकाशित आलेख में बताया था कि किस प्रकार 2013 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दो अन्य कंपनियों के साथ हिंडाल्को को दो कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में आवंटन से संबंधित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बिरला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दायर की. इन ब्लॉक का उद्देश्य हिंडाल्को के बिजली संयंत्रों को आपूर्ति करना था. (एल्युमिनियम निकालने में भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है और एल्युमिनियम संयंत्रों को अपनी आवश्यकता के लिए सामान्यतः समर्पित बिजली संयंत्रों की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए, रेणुकूट केंद्र को उसकी अपनी पनबिजली केंद्र से बिजली की आपूर्ति होती है). इसके बाद की जांच में आदित्य बिरला समूह के कार्यालय से 25 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नकदी प्राप्त हुई और समूह पर करों का भुगतान न करने के एवज में आर्थिक दंड लगाया गया और ब्याज के रूप में 150 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई गई.

सीबीआई ने हिंडाल्को से एक गुप्त डायरी जब्त की है, जिसमें उस अवधि के दौरान, जब कंपनी को अपने कुछ कैप्टिव खदानों से कोयला निकालने की मात्रा दोगुना करने के लिए पर्यावरण की मंजूरी मिली थी, उस अवधि के दौरान सरकारी अधिकारियों को करोड़ों रुपए के बराबर के गुप्त भुगतान किए गए थे. 2013 में आदित्य बिरला समूह कार्यालय में सीबीआई की छापेमारी के दौरान बरामद एक दूसरी डायरी में समूह द्वारा राजनीतिज्ञों एवं विभिन्न पार्टियों के विधायकों को पिछले एक दशक के दौरान किए गए लगभग एक हजार भुगतानों की सूची थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा को बताया, “16 नवंबर 2012 को एक बैक-अप संदेश रिकवर किया गया था, जिसमें कहा गया था कि गुजरात के मुख्यमंत्री-25 करोड़ रुपए (12 हो गए-शेष?).” इस प्रकार, इससे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि 25 करोड़ रुपए का भुगतान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को किया गया था. 2001 से 2014 के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे. यहां ध्यान देने की बात है कि कुमार मंगलम बिरला, हिंडाल्को तथा आदिल्य बिरला समूह कोई भी गलत काम करने से लगातार इनकार करते रहे हैं.

सोनभद्र । देश के प्रसिद्ध उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला क्या टैक्स की चोरी करते हैं ? क्या कुमार मंगलम बिड़ला देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं ?यह प्रश्न जो अभी सिर्फ सोनभद्र के आमजनों को मथ रहा है और जैसे ही यह खबर वायरल होगी तो पूरे देश की जनता को भी परेशान करने लगेगा। खबर है कि सोनभद्र स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज जो बिड़ला समूह का एक उपक्रम है पर जगत नारायण सिंह ने आरोप लगाया है कि कम अल्युमिनियम उत्पादन दिखाने के साथ ही उसके निर्माण प्रक्रिया से उत्पन्न बायो प्रोडक्ट में गैलियम, वेनेडियम व क्रायोलाइट के उत्पाद को छुपा कर अरबो रुपए की चोरी करने के आरोप में आदित्य बिरलाा समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिडला, वर्तमान प्रेसिडेंट सतीश पेई, ग्रुप हेड संदीप गुरुमूर्ति, पूर्व प्रेजिडेंट ए के अग्रवाल के विरुद्ध अधिवक्ता विकास शाक्य के जरिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रकीर्ण वाद प्रस्तुत किया है ।

सोनभद्र के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जिस पर 9 फरवरी को न्यायालय ने संबंधित थाने से इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। वाद में बताया गया है कि आदित्य बिरलाा समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिडला, वर्तमान प्रेसिडेंट सतीश पेई, ग्रुप हेड संदीप गुरुमूर्ति, पूर्व प्रेजिडेंट ए के अग्रवाल समेत अन्य के द्वारा बॉक्साइट से बनाए जा रहे अल्मुनियम के उत्पाद को अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट से प्रोडक्शन मात्रा पेंसिल से भरवाया जाता है बाद में उत्पाद को घटाकर दिखाया जाता है। अल्मुनियम बनाते समय बायो प्रोडक्ट के रूप में गैलियम, वेनेडियम व क्रायोलाइट निकलता है। प्रोडक्शन सीट पेंसिल से भरवाया जाता है बाद में उत्पाद को घटाकर दिखाया जाता है ।

ज्ञातव्य है कि विंध्यलीडर ने अपने वेव साइट्स पर 28 और 29 जनवरी 2022 को प्रकाशित आलेख में बताया था कि किस प्रकार 2013 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने दो अन्य कंपनियों के साथ हिंडाल्को को दो कैप्टिव कोयला ब्लॉकों के आवंटन को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में आवंटन से संबंधित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बिरला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिरला के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दायर की. इन ब्लॉक का उद्देश्य हिंडाल्को के बिजली संयंत्रों को आपूर्ति करना था. (एल्युमिनियम निकालने में भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है और एल्युमिनियम संयंत्रों को अपनी आवश्यकता के लिए सामान्यतः समर्पित बिजली संयंत्रों की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए, रेणुकूट केंद्र को उसकी अपनी पनबिजली केंद्र से बिजली की आपूर्ति होती है). इसके बाद की जांच में आदित्य बिरला समूह के कार्यालय से 25 करोड़ रुपए की बेहिसाबी नकदी प्राप्त हुई और समूह पर करों का भुगतान न करने के एवज में आर्थिक दंड लगाया गया और ब्याज के रूप में 150 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई गई.

2015 में एक और एफआइआर की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि हिंडाल्को ने उसे पहले आवंटित दूसरे कोयला ब्लाक पर लीज शर्तों का उल्लंघन किया है. बताया गया कि सीबीआई ने हिंडाल्को से एक गुप्त डायरी जब्त की है, जिसमें उस अवधि के दौरान, जब कंपनी को अपने कुछ कैप्टिव खदानों से कोयला निकालने की मात्रा दोगुना करने के लिए पर्यावरण की मंजूरी मिली थी, उस अवधि के दौरान सरकारी अधिकारियों को करोड़ों रुपए के बराबर के गुप्त भुगतान किए गए थे. 2013 में आदित्य बिरला समूह कार्यालय में सीबीआई की छापेमारी के दौरान बरामद एक दूसरी डायरी में समूह द्वारा राजनीतिज्ञों एवं विभिन्न पार्टियों के विधायकों को पिछले एक दशक के दौरान किए गए लगभग एक हजार भुगतानों की सूची थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा को बताया, “16 नवंबर 2012 को एक बैक-अप संदेश रिकवर किया गया था, जिसमें कहा गया था कि गुजरात के मुख्यमंत्री-25 करोड़ रुपए (12 हो गए-शेष?).” इस प्रकार, इससे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि 25 करोड़ रुपए का भुगतान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को किया गया था. 2001 से 2014 के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी थे. यहां ध्यान देने की बात है कि कुमार मंगलम बिरला, हिंडाल्को तथा आदिल्य बिरला समूह कोई भी गलत काम करने से लगातार इनकार करते रहे हैं.

यहां यह भी बताना उपर्युक्त होगा कि हिंडाल्को और आदित्य बिरला समूह पर्यावरण संरक्षण के उल्लंघन के मामलों के अतिरिक्त,सरकारी प्रक्रियाओं के घपले करने तथा राजनीतिक एहसान लेने सहित कई प्रकार के विवादों में संलिप्त रहे हैं. 2018 में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म द्वारा की गई एक जांच ने खुलासा किया कि आदित्य बिरला समूह पिछले आठ वर्षों के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी एवं विपक्षी कांग्रेस, जो 2014 तक सत्ता में थी, दोनों को सबसे अधिक कारपोरेट चंदा दिया है. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्वेच्छा से चुनाव आयोग के समक्ष इसका खुलासा किया था कि 2019 में झारखंड में सत्ता में आने के बाद उसने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज से 1 करोड़ रुपए का दान प्राप्त किया था.

गैलियम परमाणु अस्त्र-शास्त्र एवं सैनिक उपकरण में भी प्रयुक्त होता है जिसकी कीमत 10 लाख रुपए प्रति किलोग्राम होता है वेनेडियम जंग रोधी होती है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में सेमी कंडक्टर बनाने में होता है जिसकी कीमत कई हजार रुपए प्रति किलोग्राम है। क्रायोलाइट एक असाधारण धातु है जिसका उपयोग तोप, रॉकेट और गन में किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि 28 और 29 जनवरी 2022 को एवम देश की लब्ध प्रतिष्ठित अंग्रेजी पत्रिका कारवां ने इस घोटाले को प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है कि किस प्रकार इन उद्योगपतियों द्वारा देश के चुने हुए जन प्रतिनिधियों की मिली भगत से और अधिकारियों को बांटे गए रेवड़ी से देश को चूना लगाया जाता हैं

अल्युमिनियम उत्पाद को घटाने से बायो प्रोडक्ट अपने आप घट जाता है इसलिए एक तरफ अल्युमिनियम उत्पाद की चोरी किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर बायो प्रोडक्ट उत्पाद की चोरी की जा रही है जो अरबो रुपए का प्राक्कलन है।यह चोरी राजस्व की चोरी के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

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