Saturday, December 10, 2022
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किसान सत्याग्रह के सामने झुकी मोदी सरकार – पूर्वांचल नव निर्माण मंच


संसद में कृषि कानून वापसी सुनिश्चित होने तक जारी रहेगा किसान आंदोलन ।।

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनन गारंटी के साथ साथ और भी जरुरी मुद्दों का हल निकलना बाकी है ।

सोनभद्।, जैसे ही आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा कृषि कानून वापसी की घोषणा की गई वैसे ही ही चारों तरफ किसानों के चेहरे पर विजय की खुशी देखने को मिली ।
पिछले एक साल से किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे पूर्वांचल नव निर्माण किसान मंच तथा पूर्वांचल नव निर्माण मंच के नेता श्रीकांत त्रिपाठी तथा गिरीश पाण्डेय ने कहा गांधीवादी विचारधारा से चल रहे किसानों के सत्याग्रह के सामने झुकी अहंकारी सरकार । नेता द्वय ने कहा संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर पिछले साल 26 जनवरी को सोनभद्र में विशाल ट्रैक्टर परेड निकालकर पूर्वांचल नव निर्माण मंच तथा पूर्वांचल नव निर्माण किसान मंच के किसान मोर्चे में शामिल होकर महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। बाद में 19 फरवरी को भी दोषपूर्ण कृषि कानून की वापसी के लिए प्रदर्शन करते हुए महामहिम को पत्र भेजकर कानून वापसी की मांग की गई थी। नेता द्वय ने बताया संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर 28 मार्च को सोनभद्र मे मंच के किसानों ने दोषपूर्ण काले कृषि कानून की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया था, 26 मई को आंदोलन के छह माह पूर्ण होने पर महामहिम राष्ट्रपति महोदय को पुनः ज्ञापन भेजा गया था

। इसी क्रम मे 5 जून को कृषि कानून पारित होने की पहली वर्ष गांठ पर भी विरोध दर्ज कराया गया था, मंच के किसानों के द्वारा विरोध-प्रदर्शन करते हुए । 10 जून को किसानों ने काला दिवस मनाकर घरों पर काला झंडा फहराते हुए विरोध दर्ज कराया तो 26 जून को अघोषित आपातकाल दिवस मनाकर विरोध दर्ज कराया था। नेता द्वय ने बताया मँहगाई के विरोध मे संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर दिनांक 8 जुलाई को केन्द्र सरकार का पुतला दहन किया गया था तो 17 जुलाई को विपक्ष के नेताओं को भी पत्र लिखकर किसान आंदोलन के समर्थन का आह्वान किया गया था । नेता द्वय ने कहा की किसानों के आंदोलन के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी का समर्थन लगातार किसानों को मिलता रहा। संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर लगातार मंच के किसान सोनभद्र मे काले कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन आयोजन करते रहे । इसी क्रम मे लखीमपुर खीरी मे मृतक किसानो को न्याय दिलाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर जनप्रतिनिधियों का पुतला दहन करने पर सोनभद्र पुलिस द्वारा मंच के किसानों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।


नेता द्वय ने बताया कि जबतक कृषि कानून संसद मे संवैधानिक रुप से वापस नही हो जाता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनन गारंटी तथा अन्य कृषि समस्याओं पर सरकार से सहमति नही बन जाती, किसान आंदोलन जारी रहेगा । नेता द्वय ने कहा भाजपा सरकार ने सहानुभूति मे कानून वापसी की घोषणा नहीं की है, यह चुनाव हारने का भय है जो सरकार किसानों की बात करने लगी है ।

इस क्रम मे आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए कल दोपहर बारह बजे नवीन सब्जी मंडी परिसर मे संयुक्त किसान मौर्चे की तरफ से किसानों के साथ एक बैठक की जायेगी जिसमे आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

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