Saturday, July 13, 2024
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काला जंग दांव ने अखाड़े से अंगद का पाँव उखाड़ ही दिया

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(समर सैम की रिपोर्ट) विंध्यलीडर न्यूज़ नेटवर्क की ख़बर का हुआ असर,उखड़ा अंगद का पाँव


सोनभद्र। उप जिलाधिकारी ओबरा ने जिलाधिकारी के आदेश पर दिनांक 2 फरवरी 2023 को ओबरा तहसील में कुछ लेखपालों का ट्रांसफर किया। इस ट्रांसफर के लिए जमकर नूराकुश्ती देखने को मिली। आपको बताते चलें कि काला जंग रेसलिंग की दुनियां का एक ऐसा अचूक दांव है जिसने बिल्ली मारकुंडी के अखाड़े में अंगद का पाँव बन चुके लेखपाल का पाँव उखाड़ दिया। पहलवानी के दुनियां से ताल्लुक रखने वालों की मानें तो काला जंग पहलवानी की दुनियां का एक ऐसा दांव है जो सही पड़ा तो विरोधी पहलवान चारो खाने चित। फिर तो वह चाहे अंगद का पाँव ही क्यों न हो। आखिर बिल्ली मारकुंडी के अखाड़े में काला जंग दांव ने अंगद का पाँव बन चुके पहलवान को चित कर ही दिया।
आपको बताते चलें कि यदि कुछ दिनों के घटनाक्रम पर विचार करें तो पता चलेगा कि बिल्ली मारकुंडी का लेखपाल अंगद का पांव बन चुका था। लगातार ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी उसका कुछ नहीं हो रहा था। जब कोइ लेखपाल बिल्ली मारकुंडी पोस्टिंग के लिए सिफारिशन भाग दौड़ करता था तो, सिंडिकेट के लोग हंसते थे कि अरे यह लेखपाल पागल हो गया है क्या जो गूलर का फूल मांगता है। खैर जनता की तरफ से लेखपाल की शिकायत मिलने पर राज्य सभा सदस्य ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर लेखपाल के ट्रांसफर की गुजारिश की थी परन्तु इसके बाद भी लेखपाल का बाल बांका नहीं हो सका था। सोनभद्र से लेकर लखनऊ तक बिल्ली मारकुंडी में तैनात लेखपाल की पैरवी हो रही थी।


इसी बीच एसडीएम ओबरा की जांच पत्र में खननकर्ताओं के साथ दुरभिसन्धि करके अपराध कारित करने का गंभीर आरोप भी लेखपाल पर लगा। एसडीएम ओबरा का यह पत्र सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ परन्तु इसके बाद भी बिल्ली मारकुंडी खनन सेक्टर का लेखपाल अंगद का पाँव बना रहा। जब गेंद पत्रकारों के पाले में गई, तब जाकर लेखपाल के कारनामों का कच्चा चिट्ठा समाज के सामने बेनक़ाब होने लगा। समय की शिला पर खड़ी जनता सोंच रही थी कि भ्र्ष्टाचार के गंभीर आरोप लगने के बाद एवं उच्च सदन के सदस्य की सिफारिश के बाद भी एक लेखपाल का ट्रांसफर क्यों नहीं हो पा रहा है। मीडिया के मोर्चा संभालते ही विवश होकर प्रशासन ने अंगद का पाँव बन चुके लेखपाल का ट्रांसफर बिल्ली मारकुंडी से कनछ कर दिया। वहीं कनछ के लेखपाल ओम प्रकाश सिंह का तबादला बिल्ली मारकुंडी कर दिया गया। ओम प्रकाश सिंह अपनी साफ सुथरी छवि के लिए जाने जाते हैं। बाल्यवस्था से ही वह संघ की शाखाओं में जाते रहें हैं। वहीं उनका परिवार कई पीढ़ियों से गोरखनाथ पीठ से भी जुड़ा हुआ है। मंदिर में गुरु गोरखनाथ जी द्वारा जलाई अखण्ड ज्योति त्रेतायुग से आजतक अनेक झंझावातों के बाद भी अखण्ड रूप से जलती आ रही है। लेखपाल ओम प्रकाश सिंह का परिवार कई पीढ़ियों से इस अखण्ड ज्योति के प्रकाश पुंज के पुण्य प्रताप के दर्शन करने गोरखनाथ पीठ जाता रहता है। उम्मीद लगाई जा रही है कि अवैध खनन के लिए दुरभिसंधि करके अपराध कारित करने वाले लेखपालों की जो परिपाटी बिल्ली मारकुंडी खनन बेल्ट में चल रही थी, उस सिलसिले पर अब पूर्ण वीराम लग जाएगा।

मीडिया ने जब अवैध खनन के खेल को उजागर किया तब जाकर बिल्ली मारकुंडी के लेखपाल के कारनामें उजागर होने शुरू हुए। इससे जिला प्रशासन एवं योगी सरकार की जग हसाई होने लगी। अन्तोगत्वा अंगद का पाँव बन चुके लेखपाल का पाँव उखड़ ही गया। काफी अरसे बाद बिल्ली मारकुंडी के लेखपाल के ट्रांसफर और पोस्टिंग का रिमोट कंट्रोल खनन सिंडिकेट के हाथों से छिना। पूर्व में तैनात लेखपाल को बिल्ली मारकुंडी में जमाये रखने के लिए जिलाधिकारी पर जमकर दबाव डाला गया। इसमें मंत्री और विधायक सिंडिकेट के इशारे पर लगातार दबाव बना रहे थे। मीडिया में लगातार किरकिरी होने के चलते नटोरियस लेखपाल को आखिरकार अपना बोरिया बिस्तर बांधकर बिल्ली मारकुंडी खनन बेल्ट से जाना ही पड़ा। खनन सेक्टर में चर्चा ए आम है कि लेखपाल अरुणोदय पांडे को खनन सिंडिकेट के बदौलत बसपा के एक मात्र लसडा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह का वरदहस्त प्राप्त था। गोयल जी से उमाशंकर सिंह की गलबहियां दारुल शिफा से लेकर लोकभवन तक चर्चा ए आम है। लखनऊ के गलियारों में चर्चित लेखपाल अरुणोदय पांडे की पैरवी करते हुए खनिज विभाग के कुछ पुराने कर्मचारी जो विभाग की मठाधीशी करते थे और यहां पर सर्वेयर भी रह चुके हैं ,भी देखे गए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी कठिन डगर है बिल्ली मारकुंडी की। सिंडिकेट के वर्चस्व को तोड़ते हुए वर्षों बाद सिंडिकेट की मर्ज़ी के बगैर किसी लेखपाल को गूलर का फूल मिला है।अब देखना दिलचस्प होगा कि उक्त लेखपाल कितने दिनों तक वहां जमे रहते हैं ?

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