Saturday, May 18, 2024
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एनसीएल कृष्णशीला कोल माइन्स एरिया में अवैध रूप से भंडारित कोल देश का सबसे बड़ा स्कैम-सन्दल परवीन

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सोनभद्र से समर सैम

सोनभद्र। कृष्णशिला कोल माइन्स परियोजना क्षेत्र में उसकी ही जमीन पर लाखों टन कोयले का अवैध भंडारण का मामला व सोन नदी की तलहटी में बालू/मोरम के खनन से उसमें पाए जाने वाले जलीय जीव मसलन घड़ीयाल और मगर के लिए संरक्षित इको जोन अंतर्गत सोन नदी में बालू खनन का हुआ पट्टा अवैध है उक्त बात एनजीटी में अधिवक्ता अभिषेक चौबे के माध्यम से याचिका दायर करने वाली सन्दल परवीन ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कही।

आपको बताते चलें कि सोनभद्र की एनसीएल कोल माइन्स कृष्णशिला परियोजना की जमीन पर लाखों टन कोयला भंडारित कर रखा गया था जिसे जिला प्रशासन ने सीज कर दिया था। अधिवक्ता अभिषेक चौबे के माध्यम से याचिकाकर्ता ने याचिका दायर कर उस पर रोक लगाने की अपील की है। अरबो रूपये के उक्त भंडारित कोल मामले में एनजीटी ने अवैध भण्डारण और सोन नदी की तलहटी में होने वाले अवैध खनन और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान के लिए एन जी टी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर अगली सुनवाई से पूर्व रिपोर्ट मांगी है और 20 फरवरी 2023 को होगी अगली सुनवायी की तिथि निर्धारित की है। इस आशय की जानकारी याचिकाकर्ता संदल परवीन ने एक प्रेस वर्ता के दौरान पत्र प्रतिनिधियों से बात चीत करते हुए कही।

उन्होंने बताया कि विगत दिनों कृष्णशीला रेलवे साइडिंग पर लगभग 10 मिलीयन टन कोयले का अवैध भण्डारण पकड़ा गया था। जिसकी कीमत अरबो में आँकी गयी थी। पकड़े जाने के समय अवैध रूप से भंडारित उक्त कोयले का कोई अधिकृत व्यक्ति अथवा कम्पनी स्वामित्व तक पेश करने सामने नहीं आई थी। जिससे यह स्पष्ट है कि कोयले की तस्करी के काले खेल का अवैध कारोबार धडल्ले से चलाया जा रहा था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अवैध रूप से कोयले के भण्डारण से पर्यावरण का भी भारी नुकसान हो रहा है। स्वयं की जाँच से यह पाया गया कि उक्त मामला देश के एक बड़े उद्योगपति से जुड़ा हुआ है जिसमें कई सफेद पोस भी शामिल है जिसके सम्बन्ध में उच्चस्तरीय जाँच के लिए याचिका सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने की भी तैयारी चल रही है।

फिलहाल त्वरित रूप से अवैध भण्डारण एवं इससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और जिम्मेदार लोगों पर कार्यवाही हेतु नेशनल ग्रीन ट्युबनाल नई दिल्ली के प्रिंसपल बेंच में याचिका प्रस्तुत की गयी जिस पर लम्बी बहस के पश्चात अदालत ने रिजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राज्य सचिव तथा जिलाधिकारी सोनभद्र की त्रिस्तरीय कमेटी गठित करके विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। कोल माइन्स प्रकरण में अब तक का बरामद कोयले के अलावा जितने कोयले का अवैध तरीक से परिवहन किया जा चुका है वह सब मिलाकर देखा जाय तो देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला अर्थात देश का दूसरा के जी एफ़ साबित होगा।

याचिकाकर्ता परवीन ने यह भी बताया कि अगोरीखास में भी सोन नदी की जलधारा को बाँध कर बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। जबकि सोन नदी घड़ियाल और मंगर के लिए संरक्षित क्षेत्र है। वर्ष 2005 में कमला पाण्डेय बनाम उ0प्र0 सरकार के मामले में उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने घडियाल और मगर के लिए संरक्षित नदी होने के कारण सोन नदी की बालू खनन लीज निरस्त कर दी थी। परन्तु वर्तमान सरकार द्वारा सोनभद्र के पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करते हुए दर्जनों लोगों को सोन नदी में बालू खनन की लीज दे दी गयी है। धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। इस बावत समाजिक कार्यकर्ता सन्दल परवीन ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल नई दिल्ली में याचिका दाखिल की थी।जिसमे कमेटी बनाकर एनजीटी ने रिपोर्ट तलब किया है।

परवीन ने कहा कि सोनभद्र के खनिज सम्पदा की लूट मची है। जिससे सोनभद्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। सोनभद्र के पर्यावरण संतुलन और अवैध काले कारोबार के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा यह कहना है याचिकाकर्ता एवं सोशल एक्टिविस्ट संदल परवीन का। आखिर दुनिया पर्यावरण प्रदूषण से त्रस्त है तो ऐसे नाज़ुक हालात में बीजेपी सरकार क्यों लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने पर आमादा है। समय की शिला पर खड़ी जनता सोंच रही है कि क्या सरकार ने ही धरती को नरक बनाने का ठेका ले लिया है।

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