Contact Information

Maya Niwas, ward 5, Jawahar Nagar, sonbhadra Pin: 231216

We Are Available 24/ 7. Call Now.

सोनभद्र। जिला कृषि अधिकारी जनार्दन कटियार ने जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान एवं पंजाब/हरियाणा के कुछ क्षेत्रों एवं उ0प्र0 के झांसी और ललितपुर जनपदों में टिड्डी दल का प्रकोप दिखाई दिया है। जनपद आगरा, मथुरा, हाथरस में टिड्डी दल के आक्रमण की सम्भावना है, निरन्तर निगरानी की जाय, जिससे किसी भी स्तर के प्रकोप की दशा में स-समय टिड्डी दल पर नियंत्रण पाया जा सके। जनपद के किसान भाईयों को टिड्डी कीट के बारे में एवं नियंत्रण के सम्बन्ध में सलाह दी जाती है।
सम्पूर्ण संसार में इसकी केवल छह जातियां पाई जाती हंै और इसकी उड़ान दो हजार मील तक पाई जाती है। मादा टिड्डी मिट्टी में कोष्ठ बनाकर रहती है। प्रत्येक कोष्ठ में 20 से लेकर 100 अण्डे तक रखती हैं। गरम जलवायु में 10 से लेकर 20 दिन तक में अण्डे फूट जाते हैं शिशु टिड्डी के पंख नहीं होते हैं तथा अन्य बातों में यह वयस्क टिड्डी के समान होती है शिशु टिड्डी का भोजन वनस्पति है और ये पांच छः सप्ताह में वयस्क हो जताी है। इस अवधि में 04 से 06 बार इसकी त्वचा बदलती है। वयस्क टिड्डीयों में 10 से लेकर 30 दिनों तक में प्रौढ़ता आ जाती है और तब ये अण्डे देती हैं। कुछ जातियों में यह काम कई महीनों में होता है। टिड्डी का विकास आर्द्रता और ताप पर अत्याधिक निर्भर करता है। इनके निवास स्थान उन स्थानों पर होते हैं जहां जलवायु असंतुलित होती और निवास स्थान सीमित होते हैं, इन स्थानों पर रहने से अनुकूल ऋतु इनकी सीमित संख्या को फैलाने में सहायता होती है। यह झील में गिरनेवाली नदियों के बालू पर रहने से अनुकूल ऋतु इनकी सीमित संख्या को फैलाने में सहायक होती है। यह झील में गिरनेवाली नदियों के बालू में घास के मैदानों में शुष्क तथा गरम मिट्टी में निवास करती है। वयस्क टिड्डीयों गरम दिनों में झुण्डों में उड़ा करती है। उड़ने के कारण पेशियां सक्रिय होती है, जिससे शरीर का ताप बढ़ जाता है। वर्षा तथा जाड़े के दिनों में इनकी उड़ाने बन्द रहती है। मरूभूमि टिड्डियों के झुंड, ग्रीष्म मानसून के समय अफ्रीका से भारत आती हैं दूसरी मानसूनी वर्ष के समय इनका प्रजजन होता है, टिड्डी फसल और वनस्पति को नाश करती है।
उन्होंने नियंत्रण के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि टिड्डियों का उपद्रव आरंभ हो जाने के पश्चात इसे नियंत्रित करना कठिन है। टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना ग्राम प्रधान, लेखपाल कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक, ग्राम पंचायत अधिकारी, प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों के माध्यम से जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग को तत्काल दें। सामान्यत टिड्डी दिन में खाती एवं रात्रि में अण्डें देती है यदि किसी क्षेत्र में विशेष रूप से टिड्डी दल रात्रि में रोक जाता है तो प्रातः ही उस क्षेत्र की जुताई कर दें। टिड्डी के प्रकोप की दशा में एक साथ इकट्ठा होकर टीन के डिब्बे, थालियों, ढोल मजीरों डीजें आदि को बजाकर शोर मचायें, शोर से टिड्डी दल आस-पास के खेतों में आक्रमण नहंी कर पाती है। बसन्त के मौसम एवं बलूई मिट्टी में टिड्डी के प्रजनन एवं अण्डे देने के लिए सर्वाधिक अनुकूल दशा होती है, टिड्डी के दल के आक्रमण से सम्भावित ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवादें एवं जल का भराव करा दें। ऐसी दशा में ट्डिडी के विकास की सम्भावना कम हो जाती है। टिड्डीयों को पानी और मिट्टी के तेल से भारी नाद में गिराकर नष्ट किया जाय। शाम के समय खेतों के चारों तरफ ध्वनी उत्पन्न कर बैठने नहीं दिया जाय। शाम के समय फसलों के चारों तरफ मशाल जलायें एवं प्रकाश करें। जैविक नियंण के रूप में बयूवेरिया बेसियाना कि 2.5 किग्रा मात्रा को 600-700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें। टिड्डी दल पर नियंत्रणपाने के लिए विषैली औषधियों से बना विषैला चारा जैसे मिथाईल पैराथियान 02 प्रतिशता धूल में भीगी हुई गेंहू की भूषी का फैलाव करें। प्रकोप दिखाई देने पर मिथाइल पैराथियान 02प्रतिशत धूल की 25-30 किग्रा मात्रा को प्रति हेक्टेयर कि दर से छिड़काव करें। मैलाथियांन 50 प्रतिशत ई0सी0 की 2.500 लीटर या फिफरोनिल 5 प्रतिशत एस0सी0 की 01 से 1500 लीटर या थामे थोक्शन 25 प्रतिशत डब्लू0जी0 की 100 ग्राम या इमिडाक्लोप्रिड 178 प्रतिशत की 100 मिली या क्यूनालफाॅस 25 प्रतिशत ई0सी0 की 01.500 लीटर या क्लोरेपायरीफाॅस 20 प्रतिशत ई0सी0 की 1.500 लीटर मात्रा को 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। टिड्डी दल के आक्िरमण की दशा में क्षेत्रीय केन्द्रीय एकीकृत नाशी जीव प्रबन्धन लखनऊ को फोन नं0-0522-273203 एवं ईमेल आई0डी0 सूचित करें। ताकि प्रशिक्षित व्यक्तियों एवं समुचित यंत्रों के माध्यम से नियंत्रण कराया जा सके। टिड्डी दल के प्रकोप की सूचना विकास खण्ड स्तर पर ग्रुप-बी, प्रभारी कृषि रक्षा इकाई को एवं जनपद पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी, सोनभद्र के फोन नं0-6394944133 पर दें तथा किसी जानकारी के लिए सम्पर्क करें।

Share:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *